कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज कुरुक्षेत्र में आयोजित पार्टी के प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के बाद वापस लौट गए। यह शिविर पिछले 10 दिनों से चल रहा था, जिसमें हरियाणा और उत्तराखंड के जिला कांग्रेस अध्यक्षों ने हिस्सा लिया। राहुल गांधी ने शिविर के आखिरी चरण में पहुंचकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में नया जोश भरा। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा, और प्रदेश प्रभारी बी.के. हरिप्रसाद जैसे वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे, जो उनके साथ ही काफिले में रवाना हुए।
इस दौरे के दौरान राहुल गांधी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। उन्होंने न केवल जिला अध्यक्षों के साथ बैठक की, बल्कि उनके परिवारों, बच्चों और निजी लोगों से भी आत्मीयता से मिले। उन्होंने सभी के साथ बैठकर लंच किया और बच्चों के साथ हंसी-मजाक भी किया। उपस्थित नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी ने लगभग 4-5 घंटे का समय उनके बीच बिताया, जिससे कार्यकर्ताओं को यह महसूस हुआ कि वे एक परिवार का हिस्सा हैं। करनाल की नेत्री गुरविंदर कौर ने बताया कि राहुल गांधी की सादगी और उनकी मुस्कान ने सभी का दिल जीत लिया।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों को स्पष्ट संदेश दिया कि उन्हें निडर होकर काम करना है। उत्तराखंड से आए एक विधायक और जिला अध्यक्ष ने बताया कि राहुल गांधी ने कहा, “डरो मत, क्योंकि अगर डरोगे तो कांग्रेस को आगे नहीं बढ़ा पाओगे।” उन्होंने सत्य, अहिंसा और न्याय के मार्ग पर चलने की सीख दी और महात्मा गांधी व डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को आत्मसात करने को कहा। उनका मुख्य जोर इस बात पर था कि नेता और कार्यकर्ता खुद को वैचारिक रूप से मजबूत करें और जनता के बीच जाकर उनके मुद्दों को उठाएं।
शिविर में एक महत्वपूर्ण चर्चा संगठन की मजबूती और आंतरिक गुटबाजी को लेकर भी हुई। हालांकि, राहुल गांधी ने सीधे तौर पर किसी गुट का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने एकजुटता पर जोर दिया। अंबाला सिटी के जिला अध्यक्ष पवन अग्रवाल और सोनीपत के जिला अध्यक्ष ने बताया कि राहुल गांधी ने कहा कि लड़ाई केवल विरोधी पार्टी से नहीं, बल्कि ईडी और सीबीआई जैसी संस्थाओं के दुरुपयोग के खिलाफ भी है, जिसे मिलजुलकर ही जीता जा सकता है। उन्होंने जिला अध्यक्षों को भविष्य में अधिक अधिकार और जिम्मेदारियां देने का भी संकेत दिया।
इस दौरे पर भाजपा नेताओं की बयानबाजी का भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जवाब दिया। हरियाणा सरकार के मंत्री महिपाल ढांडा द्वारा कांग्रेस को “टूटा हुआ तांगा” कहे जाने और राहुल गांधी को “प्रशिक्षण की जरूरत” बताने पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत टिप्पणी करने के बजाय मुद्दों और विकास पर बात करनी चाहिए।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी का यह कुरुक्षेत्र दौरा कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं को संगठित करने और उनमें आत्मविश्वास भरने की एक कोशिश थी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रशिक्षण और ‘प्यार की झप्पी’ का असर हरियाणा कांग्रेस की गुटबाजी पर कितना पड़ता है और क्या आने वाले समय में पार्टी के बड़े नेता एक मंच पर साथ नजर आएंगे।