करनाल स्थित नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) में आयोजित तीन दिवसीय भव्य पशु मेले और कृषि एक्सपो का आज गरिमामय समापन हुआ। इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुओं और उनके समर्पित पशुपालक किसानों को मेडल एवं रिबन पहनाकर सम्मानित किया। मेले के अंतिम दिन भारी उत्साह देखा गया, जहाँ प्रदेश के कोने-कोने से किसान अपने बेहतरीन नस्ल के पशुओं के साथ पहुँचे थे।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से न केवल पशुपालकों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि देश में दूध उत्पादन की क्षमता में भी वृद्धि होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पशु मेला और कृषि प्रदर्शनी किसानों को आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिकों के नए शोधों से रूबरू कराने का एक सशक्त माध्यम है। यहाँ मौजूद वैज्ञानिकों और विभिन्न स्टालों के माध्यम से किसानों को जो जानकारी मिली है, वह उनके उत्पादन को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कृषि मंत्री ने आगामी लक्ष्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य 2047 तक किसानों की वास्तविक आय को चार गुना तक बढ़ाना है। इसके लिए प्राकृतिक और जैविक (ऑर्गेनिक) खेती को बढ़ावा देना अनिवार्य है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार का लक्ष्य देश की कुल कृषि योग्य भूमि के कम से कम 20 प्रतिशत हिस्से को पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती के दायरे में लाना है। रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से जमीन की सेहत और अनाज की गुणवत्ता पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि जहरीले अनाज से कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। ऑर्गेनिक खेती की ओर मुड़ने से न केवल बीमारियां कम होंगी, बल्कि युवाओं का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
मेले के दौरान आकर्षण का केंद्र रही नरवाना से आई ‘गोरा’ नामक गाय, जिसने मिल्क ब्यूटी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। गोरा की सुंदरता और उसकी दूध देने की क्षमता ने सभी का ध्यान खींचा। पशुपालक ने बताया कि यह गाय पीक सीजन में 20 लीटर तक दूध देती है, जो हरियाणा नस्ल की गायों में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले भी यह गाय कुरुक्षेत्र में आयोजित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी है। कृषि मंत्री ने खुद आगे बढ़कर गोरा को रिबन बांधकर सम्मानित किया और पशुपालकों के धैर्य एवं मेहनत की सराहना की।
सांस्कृतिक मूल्यों पर बात करते हुए कृषि मंत्री ने कलाकारों को अपनी कला और संस्कृति के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कलाकारों को ऐसे गीतों या कला का प्रदर्शन करना चाहिए जिससे देश, प्रदेश और गांव का सम्मान बढ़े। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में कृषि मंत्री ने सभी विजेता किसानों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि करनाल का यह एनडीआरआई संस्थान इसी तरह नई तकनीकों के माध्यम से किसानों और पशुपालकों का मार्गदर्शन करता रहेगा। मेले के समापन पर किसानों ने भी सरकार की इस पहल का स्वागत किया और कहा कि ऐसे मंच उन्हें अपने हुनर को दिखाने और नई चीजें सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।