करनाल जिले के घरौंडा में डॉक्टर और एसएचओ के बीच हुए मारपीट विवाद ने पिछले कुछ दिनों से पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को हिलाकर रख दिया था। इस संवेदनशील मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (HCMS) ने अपनी प्रदेश व्यापी हड़ताल को समाप्त करने का आधिकारिक निर्णय लिया है। करनाल के ट्रामा सेंटर के बाहर आयोजित एक प्रेस वार्ता में डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि जनहित और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए वे काम पर वापस लौट रहे हैं, हालांकि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
इस विवाद की जड़ें होली वाले दिन की एक घटना से जुड़ी हैं, जब घरौंडा सीएचसी में तैनात डॉक्टर प्रशांत चौहान के साथ एसएचओ दीपक कुमार और उनके साथी पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट की गई थी। एसोसिएशन का आरोप है कि डॉक्टर को ड्यूटी के दौरान थप्पड़ मारा गया और घसीटकर थाने ले जाया गया, जहाँ उन्हें घंटों बंधक बनाकर रखा गया। इस घटना के विरोध में शनिवार को पूरे हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया गया था, जिससे हजारों मरीज प्रभावित हुए।
प्रेस वार्ता के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक दृष्टि से केस बनने के बावजूद पुलिस ने आरोपी एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल की। पुलिस द्वारा न्याय न मिलने की निराशा के कारण अब पीड़ित डॉक्टर के परिवार ने माननीय न्यायालय की शरण में जाने का फैसला किया है। डॉक्टरों ने साफ किया कि वे अब पुलिस जांच पर भरोसा करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से आरोपियों को सजा दिलाएंगे। एसोसिएशन ने घोषणा की है कि वे इस कानूनी लड़ाई में डॉक्टर प्रशांत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
हड़ताल वापस लेने के पीछे एक बड़ा कारण करनाल के जिला उपायुक्त (डीसी) उत्तम सिंह का सकारात्मक हस्तक्षेप रहा। डॉक्टरों ने बताया कि डीसी करनाल के साथ हुई कई दौर की बैठकों के बाद एक ठोस प्रगति हुई है। डीसी के हस्तक्षेप से उस रात एसएचओ के साथ मौजूद सात अन्य पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। एसोसिएशन ने इस कदम का स्वागत किया है, हालांकि उनकी मुख्य मांग एसएचओ की गिरफ्तारी और एफआईआर को लेकर अब भी बरकरार है।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू डॉक्टर प्रशांत चौहान के खिलाफ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पुरानी शिकायतों और वीडियो को लेकर भी सामने आया। डॉक्टर एसोसिएशन ने इन शिकायतों को ‘द्वेषपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि यह पुलिस द्वारा जवाबी कार्रवाई के तहत डॉक्टर का मनोबल तोड़ने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि ये शिकायतें घटना से पहले क्यों नहीं की गईं। एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि डॉक्टर प्रशांत इस समय मानसिक सदमे (ट्रॉमा) में हैं, इसलिए उनकी ड्यूटी घरौंडा से बदलकर करनाल के नागरिक अस्पताल में लगा दी जाए ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सकें।
प्रदेश भर के मरीजों के लिए यह राहत भरी खबर है कि सोमवार सुबह 9:00 बजे से सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं सुचारू रूप से शुरू हो जाएंगी। डॉक्टरों ने कहा कि वे बुद्धिजीवी वर्ग से आते हैं और वे नहीं चाहते कि न्याय की इस लड़ाई में किसी गरीब मरीज की जान जोखिम में पड़े। आपातकालीन सेवाएं और पोस्टमार्टम कार्य पहले की तरह ही जारी रहेंगे। डॉक्टरों ने मीडिया, आईएमए, और विभिन्न सामाजिक संगठनों का धन्यवाद किया जिन्होंने इस संघर्ष में उनका साथ दिया।