March 8, 2026
8 March 19

करनाल में इन दिनों दक्षिण भारत की कला और उत्तर-पूर्व के कच्चे माल का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। आंध्र प्रदेश से आया एक शिल्पकार परिवार शहर के सेक्टर-12 स्थित बिजली वितरण निगम कार्यालय के बाहर अपना डेरा डाले हुए है। यह परिवार असम के जंगलों से आने वाले विशेष ‘बेंत’ (Cane) का उपयोग कर घर की शोभा बढ़ाने वाले बेहद सुंदर और टिकाऊ फर्नीचर तैयार कर रहा है। पिछले करीब एक महीने से करनाल में मौजूद यह परिवार अपनी पुश्तैनी कला के जरिए लोगों को प्लास्टिक और सिंथेटिक फर्नीचर के बजाय प्राकृतिक और ऑर्गेनिक विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहा है।

बेंत का फर्नीचर, जिसे अंग्रेजी में ‘केन फर्नीचर’ कहा जाता है, अपनी मजबूती और विंटेज लुक के लिए जाना जाता है। शिल्पकार नागेश राव, जो पिछले 45 वर्षों से इस काम में लगे हैं, बताते हैं कि यह बेंत विशेष रूप से असम और गुवाहाटी की मिट्टी में पैदा होता है। वहां से इसे ट्रकों के जरिए मंगवाया जाता है। फर्नीचर बनाने की प्रक्रिया काफी धैर्य और मेहनत वाली है। बेंत को इस्तेमाल करने से पहले उसे करीब 15-20 दिनों तक पानी में भिगोकर रखा जाता है ताकि वह लचीला हो सके। इसके बाद हाथों से उसकी सफाई की जाती है और फिर उसे अलग-अलग आकारों में मोड़कर सोफा, कुर्सियां, टेबल और झूले तैयार किए जाते हैं।

इस प्रदर्शनी में मिलने वाला फर्नीचर न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल भी है। आज के समय में जब ग्लोबल वार्मिंग और प्लास्टिक प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, ऐसे में यह ऑर्गेनिक फर्नीचर एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहा है। शिल्पकारों का दावा है कि बेंत का फर्नीचर यदि सही तरीके से रखा जाए, तो यह 20 से 25 साल तक खराब नहीं होता। इसकी एक और खासियत यह है कि इसे आसानी से धोया जा सकता है और धूप में सुखाकर फिर से नया जैसा बनाया जा सकता है।

प्रदर्शनी में केवल भारी फर्नीचर ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए छोटे झूले, कुर्सियां, बुक शेल्फ, शू रैक और बेड साइड टेबल जैसी कई उपयोगी वस्तुएं भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा, रात के समय घर को रोशन करने के लिए बेंत से बने ‘शैडो लैंप’ विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन लैंपों से निकलने वाली रोशनी दीवारों पर सुंदर आकृतियां बनाती है, जो बगीचों और बरामदों की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। शिल्पकारों के अनुसार, एक सोफा सेट तैयार करने में उन्हें लगभग एक हफ्ते की कड़ी मेहनत लगती है, जिसमें पूरा परिवार दिन-रात जुटा रहता है।

यह परिवार हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे पंजाब, चंडीगढ़ और राजस्थान की यात्रा करता है और अपनी कला का प्रदर्शन करता है। करनाल के लोग भी इस हस्तशिल्प की काफी सराहना कर रहे हैं और अब तक शिल्पकार दो गाड़ी माल बेच चुके हैं। हालांकि, शिल्पकारों ने एक टीस भी जाहिर की कि अक्सर लोग बड़े शोरूम में तो मोलभाव नहीं करते, लेकिन सड़क किनारे मेहनत करने वाले इन छोटे कलाकारों से काफी मोलभाव करते हैं।

आने वाले एक हफ्ते या दस दिनों तक यह प्रदर्शनी करनाल के सेक्टर-12 में लगी रहेगी, जिसके बाद यह परिवार राजस्थान के लिए प्रस्थान करेगा। भारत की इस विविध संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा देना न केवल इन परिवारों की आर्थिक मदद है, बल्कि हमारी लुप्त होती पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने का एक प्रयास भी है। यदि आप भी अपने घर को एक प्राकृतिक और विंटेज लुक देना चाहते हैं, तो यह केन फर्नीचर एक शानदार विकल्प हो सकता है।

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