हरियाणा के करनाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने वर्तमान सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार देते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की उन नीतियों के प्रति विरोध दर्ज कराना था, जो सीधे तौर पर किसानों, युवाओं और बुजुर्गों को प्रभावित कर रही हैं। प्रदर्शन के समापन पर जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
विरोध के केंद्र में हाल ही में अमेरिका के साथ हुई व्यापारिक संधि (ट्रेड डील) रही। कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि और किसानों के भविष्य के लिए विनाशकारी साबित होगा। उनके अनुसार, इस डील के माध्यम से सरकार ने विदेशी हितों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है। कपास, मक्का, सोया और अंगूर जैसी फसलों का उल्लेख करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भारत का निर्यात बाजार अब अमेरिका के नियंत्रण में चला जाएगा, जिससे भारतीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, डेयरी संचालकों के लिए भी इस समझौते को एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि हरियाणा के युवाओं के हक को मारकर बाहरी राज्यों के लोगों को उच्च पदों पर नियुक्त किया जा रहा है। सरकार द्वारा युवाओं को विदेशों, विशेषकर इजराइल और दुबई जैसे क्षेत्रों में रोजगार के लिए भेजने की योजना को भी अनुचित बताया गया। नेताओं का तर्क था कि सरकार स्थानीय स्तर पर उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा करने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके कारण प्रदेश का युवा गलत रास्तों की ओर प्रवृत्त हो रहा है।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राशन कार्डों के मुद्दे पर भी गहरा रोष प्रकट किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परिवार पहचान पत्र की आड़ में हजारों बुजुर्गों की सम्मान पेंशन रोकी गई और गरीबों के पीले राशन कार्ड काट दिए गए। हालांकि सरकार की ओर से हाल ही में पेंशन न काटने और एरियर देने की बात कही गई है, लेकिन कांग्रेस का मानना है कि यह केवल विपक्ष के बढ़ते दबाव और जनता के आक्रोश के कारण लिया गया एक चुनावी पैंतरा है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में संघर्ष को और तेज करते हुए मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
ज्ञापन के माध्यम से यह भी मांग की गई कि सरकार केवल कागजों और विज्ञापनों में विकास करने के बजाय धरातल पर सुधार करे। भ्रष्टाचार, महंगाई और बढ़ते अपराधों को लेकर भी शासन की जवाबदेही तय करने की अपील की गई।