शिक्षा के क्षेत्र में अक्सर यह देखा जाता है कि विज्ञान संकाय, विशेष रूप से भौतिकी (फिजिक्स), छात्रों के बीच एक डर या ‘फोबिया’ का कारण बना रहता है। जटिल सूत्र, सिद्धांत और गणितीय गणनाओं के चलते कई छात्र इस विषय में केवल उत्तीर्ण होने का लक्ष्य रखते हैं। हालांकि, करनाल की शारदा एकेडमी ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। हाल ही में संपन्न हुई सीबीएसई कक्षा 12वीं की भौतिकी बोर्ड परीक्षा के बाद एकेडमी के छात्रों के चेहरों पर जो आत्मविश्वास दिखा, वह शिक्षा जगत के लिए एक प्रेरक उदाहरण है।
एकेडमी की यात्रा और शिक्षण पद्धति के बारे में बात करते हुए छात्रों ने साझा किया कि कैसे वे परीक्षा से पहले काफी डरे हुए थे। भव्या नाम की छात्रा ने बताया कि वह सत्र के मध्य में एकेडमी से जुड़ीं क्योंकि वे फिजिक्स से पूरी तरह थक चुकी थीं, लेकिन अब वे अपने बेहतरीन स्कोर को लेकर आश्वस्त हैं। वहीं अश्मित जैसे छात्र भी हैं जिन्होंने मात्र एक महीने पहले एकेडमी ज्वाइन की थी और अब वे 95 प्रतिशत से अधिक अंक आने की उम्मीद कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो छात्र परीक्षा से पहले 40-50 अंकों की उम्मीद कर रहे थे, वे अब 90 के पार जाने का दावा कर रहे हैं।
शारदा एकेडमी के फिजिक्स ट्यूटर मोहित सर ने इस सफलता का राज साझा करते हुए बताया कि विषय को लेकर बाजार में अनावश्यक ‘हाइप’ बनाई गई है। उनका मानना है कि यदि छात्र रटने (Cramming) के बजाय कॉन्सेप्ट्स की जड़ को पकड़ें, तो कोई भी प्रश्न मुश्किल नहीं है। मोहित सर ने बताया कि सीबीएसई अब सीधे सवाल पूछने के बजाय ‘कॉम्पिटेंसी बेस्ड’ (क्षमता आधारित) प्रश्न पूछ रही है, जिसके लिए रटकर जाना काफी नहीं है। इसके लिए एकेडमी में छात्रों को नोट्स के माध्यम से सरलीकृत तरीके से पढ़ाया जाता है।
शिक्षण के प्रति एकेडमी का दृष्टिकोण काफी आधुनिक और छात्र-केंद्रित है। मोहित सर ने अपने ‘सफलता मंत्र’ के बारे में बताया कि वे प्रतिदिन सुबह 11 से 1 बजे का एक विशेष स्लॉट रखते हैं, जिसमें कोई नियमित बैच नहीं होता। यह समय उन छात्रों के लिए समर्पित है जिन्हें विषय को समझने में कठिनाई होती है या जिन्हें व्यक्तिगत ध्यान (Personalized Attention) की आवश्यकता होती है। इस समय में छात्र अपने न्यूमेरिकल का अभ्यास करते हैं और उन कांसेप्ट्स को समझते हैं जिन्हें वे मुख्य कक्षा में नहीं समझ पाए थे। यह विशेष सत्र पूरे साल चलता है, जिससे छात्रों का विषय के प्रति लगाव विकसित होता है।
छात्रों ने यह भी बताया कि एकेडमी का माहौल केवल शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायक भी है। भानुश्री नाम की छात्रा ने कहा कि सर परीक्षा के दबाव के दौरान उन्हें तनावमुक्त रखते हैं, जो प्रदर्शन सुधारने के लिए बहुत जरूरी है। एकेडमी का उद्देश्य छात्रों के दिमाग से यह डर निकालना है कि विषय कठिन है।
शारदा एकेडमी की करनाल में दो शाखाएं (सेक्टर-7 और सेक्टर-14) उपलब्ध हैं, जहां नॉन-मेडिकल के सभी विषय (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और बायो) पढ़ाए जाते हैं। एकेडमी के प्रबंधकों का कहना है कि वे हर छात्र के पेस (गति) के अनुसार पढ़ाने में विश्वास रखते हैं। बोर्ड परीक्षाओं के बाद छात्रों का यह आत्मविश्वास न केवल एकेडमी की गुणवत्ता को दर्शाता है, बल्कि अन्य विद्यार्थियों के लिए भी एक संदेश है कि सही मार्गदर्शन और समर्पण के साथ किसी भी जटिल परीक्षा को आसान बनाया जा सकता है।