करनाल जिले के मॉडल टाउन क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और क्रांतिकारी शुरुआत हुई है। देश के सुप्रसिद्ध प्ले स्कूल ब्रांड ‘बचपन’ ने अपनी नई शाखा का भव्य शुभारंभ किया है। शील्ड साइकिल के बिल्कुल विपरीत स्थित इस स्कूल का उद्घाटन एक गरिमामय समारोह के दौरान किया गया। इस अवसर पर रावल हॉस्पिटल की वरिष्ठ टीम और डॉक्टर स्वाति ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और करनाल के बच्चों के लिए इसे एक बड़ी सौगात बताया।
‘बचपन प्ले स्कूल’ का यह नया परिसर अपनी आधुनिक सुविधाओं और शिक्षा देने के अनूठे तरीकों के कारण शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। स्कूल की डायरेक्टर सारिका ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी कीड़ा बनाने के बजाय उन्हें गतिविधियों और प्रैक्टिकल नॉलेज के माध्यम से विकसित करना है। स्कूल में प्ले ग्रुप से लेकर यूकेजी तक के लिए एडमिशन्स शुरू हो चुके हैं और उद्घाटन के विशेष अवसर पर प्रत्येक एडमिशन पर 20% की फ्लैट छूट दी जा रही है।
स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर बच्चों के मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यहाँ बच्चों के लिए ‘ओपन जिम’ की सुविधा दी गई है, जो प्ले स्कूल के क्षेत्र में एक नया कॉन्सेप्ट है। इसके पीछे की सोच बच्चों को बचपन से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। इसके अतिरिक्त, स्कूल में एक शानदार ‘ऑडियो-विजुअल रूम’ है जिसे ‘थिएटर सीटिंग’ के साथ डिजाइन किया गया है। यहाँ ‘प्रिस्मार्ट स्क्रीन’ के माध्यम से बच्चों को 6 लाख से अधिक ऑडियो फाइल्स और हजारों इनबिल्ट विजुअल मॉड्यूल्स के जरिए पढ़ाया जाएगा, जिससे उन्हें चीजें रटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
शिक्षण पद्धति को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्कूल ‘स्पीको पेन’ (Speako Pen) तकनीक लेकर आया है। यह पेन किसी भी बुक पर टच करते ही संगीत या पाठ सुनाने लगता है, जिससे बच्चे बिना किसी अतिरिक्त दबाव के खुद भी पढ़ाई कर सकते हैं। इसके अलावा, स्कूल में ‘डोल रूम’ (Doll Room) बनाया गया है, जहाँ बच्चों को घर जैसा माहौल देकर सामाजिक व्यवहार और शिष्टाचार सिखाया जाता है। यहाँ मिनी किचन, बेडिंग एरिया और ड्रेसिंग एरिया के माध्यम से बच्चों को दैनिक जीवन के कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बचपन प्ले स्कूल के हेड ऑफिस से आए प्रतिनिधि मिस्टर सुनील ने बताया कि ‘बचपन’ के भारत में 1200 से अधिक स्कूल हैं और करनाल में वही ग्लोबल करिकुलम लागू किया गया है जो दुबई और सिंगापुर जैसे देशों के स्कूलों में पढ़ाया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2 से 6 वर्ष की आयु बच्चे के मस्तिष्क विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है, जिसमें 90% विकास इसी दौरान होता है। इस आयु में सही मार्गदर्शन और एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग बच्चों की नींव को मजबूत बनाती है।
सुरक्षा और स्वच्छता का भी यहाँ विशेष ध्यान रखा गया है। स्कूल यूनिफॉर्म, बुक्स और शूज के साथ-साथ घर के लिए विशेष ‘सिल्क किट’ भी प्रदान करता है ताकि बच्चे घर पर भी रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रहें। 250 से अधिक टीचिंग एड्स और सेंसरी टूल्स के साथ ‘बचपन प्ले स्कूल’ करनाल के अभिभावकों के लिए बच्चों की शिक्षा की शुरुआत का एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। स्थानीय निवासियों ने स्कूल के इस नए और रचनात्मक कॉन्सेप्ट की सराहना की है।