हरियाणा के करनाल जिले में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में आई अचानक किल्लत ने खाद्य व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। शहर के प्रसिद्ध ढाबों और रेस्टोरेंट्स में अब गैस चूल्हों की जगह दशकों पुराने डीजल वाले चूल्हों की गूंज सुनाई देने लगी है। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपजी परिवहन समस्याओं के कारण गैस की सप्लाई बाधित होने से ढाबा संचालकों को अपने पूर्वजों के समय के ‘जुगाड़’ और पुराने उपकरणों को स्टोर रूम से बाहर निकालने पर मजबूर होना पड़ा है।
करनाल के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित ढाबों का जायजा लेने पर सामने आया कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति पिछले चार दिनों से लगभग ठप है। जो सिलेंडर बाजार में सामान्यतः 1800 रुपये के आसपास उपलब्ध होते थे, वे अब कथित तौर पर ब्लैक मार्केट में 4000 रुपये तक की भारी कीमत पर बेचे जा रहे हैं। इतनी महंगी दर पर गैस खरीदना छोटे ढाबा संचालकों के लिए मुनाफे तो दूर, लागत निकालना भी मुश्किल बना रहा है। ऐसे में कई संचालकों ने अपने काम को जारी रखने के लिए डीजल वाली भट्टियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
डीजल वाला चूल्हा तकनीकी रूप से गैस चूल्हे का मुकाबला तो नहीं कर सकता, लेकिन संकट के इस समय में यह एक प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है। इन चूल्हों में एक छोटे टैंक में डीजल भरा जाता है, जो बूंद-बूंद करके भट्टी तक पहुँचता है। आग को तेज करने के लिए बिजली से चलने वाली एक मोटर का उपयोग किया जाता है जो हवा का दबाव बनाती है। संचालकों का मानना है कि यद्यपि इसमें डीजल और बिजली दोनों का खर्च आता है और यह गैस के मुकाबले महंगा पड़ता है, लेकिन ग्राहकों को सेवा देने और दुकान की साख बचाए रखने के लिए यह एकमात्र रास्ता बचा है। एक संचालक ने बताया कि उन्होंने अपने पिता के समय की पुरानी भट्टी निकाली है, जिस पर कभी उनके पूर्वज काम किया करते थे।
गैस संकट का प्रभाव केवल ढाबों तक सीमित नहीं है। शहर के वेडिंग पैलेस, रिसॉर्ट्स और कैटरर्स के सामने भी बड़ी चुनौती है। शादियों के सीजन में भारी मात्रा में भोजन तैयार करने के लिए कमर्शियल गैस की आवश्यकता होती है, लेकिन सप्लाई न होने के कारण आयोजक और कैटरर्स ऊंचे दामों पर ब्लैक में गैस खरीदने को विवश हैं। ढाबा संचालकों ने चिंता जताई है कि यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रही, तो उन्हें अपने संस्थान बंद करने पड़ सकते हैं, जिससे वहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों का रोजगार छिन जाएगा।
व्यापारियों ने प्रशासन और गैस एजेंसियों से पुरजोर अपील की है कि कमर्शियल गैस की सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए। उनका कहना है कि जहाँ घरेलू गैस का स्टॉक पर्याप्त बताया जा रहा है, वहीं कमर्शियल गैस की ऐसी किल्लत समझ से परे है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों में संभावित उछाल ने भी कारोबारियों की रातों की नींद उड़ा दी है। फिलहाल, करनाल के ढाबों में डीजल की बूंदों से जलती आग यह बयां कर रही है कि आम आदमी अपनी आजीविका बचाने के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार है।
Ground Report By Mehak Sharma & Deepali Dhiman