हरियाणा के करनाल जिले में आस्था, परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था मां काली की भव्य शोभा यात्रा का, जिसे शहर के खटीक समाज द्वारा पिछले 127 वर्षों से निरंतर और पूरी श्रद्धा के साथ आयोजित किया जा रहा है। ढोल-नगाड़ों की थाप और मां काली के जयकारों के बीच निकली इस यात्रा में न केवल करनाल, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्ति के गीतों पर थिरकते भक्तों और श्रद्धा से सराबोर माहौल ने पूरे शहर को माता के रंग में रंग दिया।
इस पारंपरिक आयोजन का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह परंपरा उनके पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थी और आज 127 साल बीत जाने के बाद भी यह उतनी ही जीवंत है। इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि इसमें युवा पीढ़ी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। बुजुर्गों से मिली इस सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को युवा न केवल सहेज रहे हैं, बल्कि इसे और भी भव्य रूप प्रदान कर रहे हैं। समाज के युवाओं और प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने मिलकर इस वर्ष भी यात्रा को सफल बनाने में अपना तन, मन और धन समर्पित किया।
शोभा यात्रा का शुभारंभ करनाल के बांसों के टोंक क्षेत्र से हुआ। वहां से मां काली का भव्य स्वरूप और झांकियां रवाना हुईं, जो शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होते हुए काली मंदिर चक्कर मार्केट तक पहुंचीं। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर माता का अभिनंदन किया। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे और शीतल जल व प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। महिलाओं में इस अवसर पर विशेष उत्साह देखा गया, जो पारंपरिक वेशभूषा में माता के भजनों पर नृत्य करती नजर आईं।
आयोजन समिति के सदस्य विकास तवर ने बताया कि इस शोभा यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य ध्येय विश्व शांति, मानवता का कल्याण और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि इसका आयोजन खटीक समाज करता है, लेकिन यह संदेश पूरे मानव समाज और सभी धर्मों के लिए है। हिंदू धर्म की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और सबको साथ लेकर चलने की भावना को यह यात्रा चरितार्थ करती है। भक्तों ने माता के चरणों में प्रार्थना की कि हमारा देश तरक्की की नई ऊंचाइयों को छुए और सभी नागरिक निरोग व सुखी रहें।
यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम रहे। समाज के स्वयंसेवकों ने यातायात और अनुशासन बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग किया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा बनकर समाज की एकजुटता की सराहना की। उपस्थित लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज की नींव को मजबूत करते हैं और आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। शाम को मंदिर परिसर में आरती और भंडारे के साथ इस वार्षिक उत्सव का समापन हुआ। मां काली के इस वार्षिक महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि श्रद्धा और परंपरा का मेल समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।