March 14, 2026
14 March 4

हरियाणा के करनाल जिले की नई अनाज मंडी आज एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक और स्वास्थ्य चेतना का केंद्र बन गई। अवसर था अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘महिला महासम्मेलन’ का, जिसमें योग गुरु स्वामी रामदेव ने शिरकत की। यद्यपि यह कार्यक्रम मूलतः 8 मार्च को होना था, परंतु किन्हीं कारणों से स्थगित होने के पश्चात आज इसे पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हरियाणा के विभिन्न जिलों—कैथल, पानीपत, सोनीपत, यमुनानगर और पलवल—से हजारों की संख्या में महिलाएं अपने परिवारों के साथ पहुंचीं।

नई अनाज मंडी का पूरा प्रांगण ‘योगमय’ नजर आया, जहाँ तिल रखने तक की जगह शेष नहीं थी। पतंजलि योगपीठ द्वारा आयोजित इस समागम में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कैथल से ही लगभग 15 बसें भरकर साधिकाएं यहाँ पहुंची थीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उन्हें दैनिक जीवन में योग को एक अनिवार्य अंग के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना था। स्वामी रामदेव ने मंच से संबोधित करते हुए महिलाओं को प्राणायाम और विभिन्न योगासनों की बारीकियों से अवगत कराया और बताया कि कैसे एक स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ परिवार और समाज का निर्माण कर सकती है।

समारोह की सबसे प्रेरणादायक कड़ी वे बुजुर्ग साधक रहे, जिन्होंने अपनी उम्र को केवल एक संख्या सिद्ध कर दिया। पानीपत से आई 80 वर्षीय माता जी और 85 वर्षीय बुजुर्ग, जो नियमित रूप से सुबह-शाम योग करते हैं, युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने। 87 वर्षीय एक बुजुर्ग साधक ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से निरंतर योग कर रहे हैं और आज भी बिना किसी दवाई के पूर्णतः स्वस्थ हैं। वहीं, कैथल से आई 73 वर्षीया महिला ने बताया कि योग की शक्ति से ही उन्होंने अपने घुटनों के दर्द पर विजय पाई है, जिसके लिए पहले उन्हें भारी दवाइयां लेनी पड़ती थीं।

सम्मेलन में केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि नन्हें बच्चों ने भी योग के प्रति अपना उत्साह दिखाया। 9 वर्षीय सानवी जैसी नन्हीं साधिकाओं ने मंच के समीप योगासन कर सबको चकित कर दिया। पलवल से आई एक महिला ने भावुक होते हुए बताया कि उनके पेट के पांच ऑपरेशन हो चुके थे और वे झुकने में भी असमर्थ थीं, लेकिन निरंतर योगाभ्यास ने उन्हें पुनः सक्रिय जीवन जीने की शक्ति प्रदान की। इन व्यक्तिगत अनुभवों ने वहाँ उपस्थित हजारों नवीन साधकों के मन में योग के प्रति अटूट विश्वास पैदा किया।

कार्यक्रम के दौरान करनाल की पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता सहित पतंजलि के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। स्वामी रामदेव ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में योग केवल कसरत नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। उन्होंने पश्चिमी देशों में भी योग की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख किया और कहा कि अब समय आ गया है कि प्रत्येक भारतीय घर ‘योगमय’ हो।

यह महासम्मेलन न केवल एक सभा थी, बल्कि स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम था। उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि वे ‘करो योग, रहो निरोग’ के मंत्र को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे। सम्मेलन की समाप्ति पर हजारों की संख्या में लोगों ने एक साथ प्राणायाम किया, जिससे नई अनाज मंडी का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया। यह आयोजन सिद्ध करता है कि उम्र और शारीरिक बाधाएं कभी भी स्वास्थ्य की राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं, यदि संकल्प योग जैसा दृढ़ हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.