February 22, 2026
22 Feb 17

करनाल जिले में स्वच्छता और सेवा की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली। रविवार की सुबह पश्चिमी यमुना नहर के किनारे किसी उत्सव जैसा माहौल था, जहाँ संत निरंकारी मिशन के लगभग 2000 सेवादारों ने मिलकर एक व्यापक सफाई अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल नहर के घाटों को गंदगी मुक्त करना था, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण और जल की महत्ता के प्रति जागरूक करना भी था।

यह विशाल आयोजन सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में किया गया, जिसे निरंकारी जगत में ‘गुरु पूजा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए, मिशन के अनुयायियों ने ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ के नारे के साथ इस कार्य की शुरुआत की। सुबह-सुबह ही बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएँ, बुजुर्ग और यहाँ तक कि छोटे बच्चे भी हाथों में झाड़ू और सफाई के उपकरण लेकर नहर के विभिन्न घाटों पर एकत्रित हो गए।

नहर की स्थिति पूर्व में काफी चिंताजनक थी, जहाँ पूजा सामग्री, नारियल और विशेष रूप से प्लास्टिक की थैलियों के कारण घाटों पर मलबे का ढेर लगा हुआ था। सेवादारों ने पूरी तन्मयता के साथ एक-एक कर इन घाटों से सारा कचरा बाहर निकाला। इस दौरान एक अनुशासित मानव श्रृंखला बनाई गई, जिसके माध्यम से तसलों में भरकर कूड़े को मुख्य मार्ग तक पहुँचाया गया। सेवादारों के इस जुनून को देखकर स्थानीय लोग भी काफी प्रभावित हुए।

नगर निगम करनाल ने भी इस नेक कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। निगम के सफाई कर्मचारी और ट्रैक्टर-ट्रालियाँ मौके पर तैनात रहे, ताकि सेवादारों द्वारा एकत्रित किए गए मलबे को तुरंत डंपिंग साइट तक पहुँचाया जा सके। नगर निगम के अधिकारियों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जब तक नागरिक स्वयं जागरूक होकर अपने शहर और जल स्रोतों की जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक पूर्ण स्वच्छता संभव नहीं है।

मिशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह अभियान केवल करनाल तक सीमित नहीं है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के मार्गदर्शन में पूरे भारतवर्ष में लगभग 1500 से अधिक जल निकायों, तालाबों और नदियों की सफाई की जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण चाहे मन के अंदर हो या बाहर, दोनों ही समाज के लिए हानिकारक हैं। आध्यात्मिक जागृति के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व निभाना भी मिशन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

अभियान के दौरान उपस्थित लोगों से विशेष अपील की गई कि वे नहर में प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री न फेंकें। यदि पूजा सामग्री प्रवाहित करनी भी हो, तो उसे प्लास्टिक की थैलियों से बाहर निकालकर ही विसर्जित करें। सेवादारों ने यह संदेश दिया कि यदि हम अपनी नदियों और सार्वजनिक संपत्तियों को अपने घर की तरह साफ रखेंगे, तभी हमारा शहर और देश प्रगति कर सकेगा। घंटों की कड़ी मेहनत के बाद, पश्चिमी यमुना नहर के घाट पूरी तरह से साफ और चमकदार नजर आने लगे, जो सेवादारों की निस्वार्थ सेवा का जीवंत प्रमाण है।

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