करनाल: ‘स्मार्ट सिटी’ करनाल के हृदय स्थल कहे जाने वाले घंटाघर चौक पर पिछले काफी समय से उपेक्षित पड़ी ऐतिहासिक प्रतिमाओं और धरोहरों की सुध आखिरकार प्रशासन ने ले ली है। सालों से मिट्टी की परतों के नीचे दबी भगवान कृष्ण और दानवीर राजा करण की प्रतिमाओं को रविवार को विशेष अभियान चलाकर साफ किया गया। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शुरू हुए इस सफाई कार्य से न केवल शहर के मुख्य चौक की चमक वापस लौटी है, बल्कि स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भी खुशी की लहर है।
करनाल अपनी ऐतिहासिक पहचान राजा करण के नाम से रखता है और घंटाघर चौक पर लगी उनकी प्रतिमा शहर की गरिमा का प्रतीक है। पिछले कई महीनों से चल रहे विकास कार्यों, विशेषकर सिंगल पिलर फ्लाईओवर के निर्माण के कारण उड़ने वाली धूल ने इन प्रतिमाओं को पूरी तरह ढक दिया था। स्थानीय प्रतिनिधि संकल्प भंडारी ने बताया कि प्रतिमाओं पर उगे पीपल के पौधों को मशीन की मदद से हटवा दिया गया है और अब जल के तेज प्रेशर से प्रतिमाओं की सफाई की जा रही है।
घंटाघर चौक के साथ-साथ महर्षि वाल्मीकि चौक की भी सफाई की गई। प्रतिमाओं पर जमा पुराने फूलों और मिट्टी को हटाकर उन्हें उनके मूल स्वरूप में वापस लाया गया है। सिल्वर की बनी इन प्रतिमाओं की चमक अब दूर से ही देखी जा सकती है। हालांकि, सफाई के इस कार्य के बीच कुछ गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं। घंटाघर चौक पर लगा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा इस समय खंडित अवस्था में है, जिसका अशोक चक्र टूटा हुआ है। इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताते हुए प्रशासन से तुरंत ठीक करने की मांग की गई है, जिस पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि एक-दो दिनों के भीतर नया चक्र और फाइबर शीशा लगवा दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, घंटाघर चौक की ऐतिहासिक घड़ी जो लंबे समय से बंद पड़ी है, उसे भी सुचारू रूप से चलाने का वादा किया गया है। वर्तमान में घड़ी की सुइयां एक ही स्थान पर थमी हुई हैं, जिससे समय का पता नहीं चलता। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को ऐसी धरोहरों की देखरेख के लिए नियमित अंतराल पर सफाई अभियान चलाना चाहिए, न कि केवल शिकायतें मिलने के बाद। फिलहाल, चौक को यातायात के लिए सुचारू बनाने हेतु मिट्टी डलवाने और गड्ढों को भरने का काम भी जारी है, ताकि बस स्टैंड से लेकर घंटाघर तक का रास्ता चलने लायक बन सके।