करनाल : शहर के मध्य में पहली बार आयोजित खादी मेला 2026 ने स्थानीय नागरिकों और हस्तशिल्प प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। भारतीय परंपरा और शिल्प कौशल को समर्पित यह आयोजन न केवल खरीदारी का केंद्र बना है, बल्कि यह देश की विविध सांस्कृतिक विरासत की एक जीवंत झलक भी प्रस्तुत कर रहा है।
इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता राजस्थान की पारंपरिक कला का प्रदर्शन है। मेले में विशेष रूप से लगाए गए जयपुरी जूतियों के स्टॉल आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं, जहाँ बारीकी से की गई कढ़ाई और बेहतरीन चमड़े का काम देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही, राजस्थान के मशहूर जायके जैसे कि विशेष नमकीन, अचार और पापड़ की खुशबू पूरे परिसर में फैली हुई है, जो आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
खादी के कपड़ों की बात करें तो यहाँ शुद्ध सूती खादी से लेकर सिल्क खादी तक के बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। कुर्ते, जैकेट, साड़ियाँ और वेस्ट कोट की एक विस्तृत रेंज उपलब्ध है, जो आधुनिक फैशन और पारंपरिक सादगी का अनूठा मेल पेश करती है। इसके अतिरिक्त, हैंडलूम सेक्टर में बेडशीट, पर्दे और घर की सजावट के सामान की भी काफी मांग देखी जा रही है।
स्वास्थ्य और सौंदर्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए मेले में हर्बल और जैविक उत्पादों के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बने साबुन, शैम्पू, शुद्ध शहद और विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक तेल यहाँ उचित मूल्य पर उपलब्ध हैं। इन उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता पर ग्राहकों का अटूट विश्वास देखने को मिल रहा है।
इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी कारीगरों और छोटे उद्यमियों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। सीधे उत्पादकों से सामान खरीदने की सुविधा होने के कारण लोगों को न केवल गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल रहे हैं, बल्कि इससे बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो गई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को प्रसारित करता यह मेला करनाल के लोगों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने और भारतीय कारीगरी का सम्मान करने का एक उत्कृष्ट अवसर साबित हो रहा है।