- करनाल जिले की सभी मंडियो में हर साल होते हैँ घोटाले
हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों को दिए जानी वाली कच्ची पर्ची का सिस्टम खत्म हो सकता है। मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कृषि विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) को 30 दिनों के भीतर ऑर्डर करने के आदेश दिए। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने अपनी याचिका में कहा था कि किसानों को कच्ची पर्ची के बजाय प्रिंटेड रसीद दी जाए। इस कच्ची पर्ची के सिस्टम से किसानों को उनकी फसल का 30-40 प्रतिशत तक दाम कम मिल रहा है। वहीं एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाए। वीरेंद्र लाठर के वकील प्रदीप रापड़िया ने बताया कि यदि वे सरकार के फैसले से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे हाईकोर्ट में दोबारा याचिका दाखिल कर सकते हैं।
कच्ची पर्ची किसानों को हाथ में थमा दी जाती है
करनाल जिले की सभी मंडियों में हर साल घोटाले होते है। धान के सीजन में किसानों से 200 रुपए कम रेट पर पीआर धान को खरीदा जाता है । जिसके बाद कच्ची पर्ची किसानों को हाथ में थमा दी जाती है। जबकि सरकार की ओर से समर्थन मूल्य में धान को खरीदता है। इसके साथ ही फर्जी गेट पास काटा जाता है जिससे धान केवल कागजों में पूरी मिली है, जो फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान मंडियों में धान नहीं मिलता है। धान घोटाले पर लगाम लगाने के लिए कच्ची पर्ची का सिस्टम बंद हो सकता है।