प्रसिद्ध किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने चुनावी राजनीति को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। कुरुक्षेत्र में पत्रकारों से बातचीत करते हुए चढूनी ने स्पष्ट किया कि वे भविष्य में कभी भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। अपने इस फैसले को दोहराते हुए उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से अपने कान पकड़े और कहा कि अब उनकी चुनावी राजनीति में उतरने की कोई इच्छा नहीं बची है।
चढूनी ने हालिया विधानसभा चुनावों के अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए जनता और मौजूदा चुनावी प्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की चुनावी व्यवस्था में ईमानदारी और काम करने वाले व्यक्ति के लिए कोई जगह नहीं है। उनके अनुसार, “जितने भ्रष्ट नेता हैं, उतनी ही भ्रष्ट जनता भी होती जा रही है।” उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि लोग शराब, पैसे और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए वोट डालते हैं, जिससे सत्ता में केवल भ्रष्ट और धनबली लोगों का ही बोलबाला रहता है।
अपने दावों को पुख्ता करने के लिए उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने 12 गांवों की करीब 6000 एकड़ जमीन, जो पिछले 60 वर्षों से सरकार के कब्जे में थी, उसे छुड़वाने का काम किया। इसके बावजूद, उन क्षेत्रों से भी उन्हें अपेक्षित जनसमर्थन और वोट नहीं मिले। चढूनी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जनता काम करवाने वाले व्यक्ति को चुनने के बजाय उन लोगों को चुनती है जो सत्ता का दुरुपयोग कर पैसा बनाते हैं।
विभिन्न राजनीतिक दलों जैसे कांग्रेस या भाजपा के साथ जुड़ने की चर्चाओं को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय ऐसी अफवाहें केवल मनोरंजन के लिए फैलाई जाती हैं, जबकि हकीकत में उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे संगठन में किस भूमिका में रहेंगे, लेकिन चुनावी मैदान में उतरने की संभावना को पूरी तरह नकार दिया है। किसान नेता के इस रुख से हरियाणा की राजनीति और किसान आंदोलनों के भविष्य को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।