करनाल के माता प्रकाश कौर स्कूल में आज एक ऐसी घटना देखने को मिली जिसने विज्ञान और साधारण मानवीय समझ को हैरत में डाल दिया। ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ की ओर से आयोजित एक विशेष कार्यशाला में उन बच्चों ने अपनी आंतरिक शक्तियों का प्रदर्शन किया, जो बोल और सुन नहीं सकते। इन बच्चों ने अपनी आँखों पर पूरी तरह से पट्टी बाँधकर न केवल जटिल चित्र बनाए, बल्कि उनमें रंगों को भी इतनी सटीकता से भरा कि देखने वाले दंग रह गए।
इस कार्यक्रम के दौरान ‘इंट्यूशन प्रोग्राम’ (सिक्स्थ सेंस जागृति) के माध्यम से बच्चों को अपनी आंतरिक ऊर्जा का सही उपयोग करना सिखाया गया। आर्ट ऑफ लिविंग की रीजनल डायरेक्टर और इंट्यूशन एक्सपर्ट श्रेया चुक के मार्गदर्शन में बच्चों ने बिना देखे अपनी शिक्षिका द्वारा बनाए गए चित्रों को महसूस किया और कागज़ पर हूबहू उतार दिया। यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं था, जहाँ एक छोटी सी बच्ची ने आँखें बंद होने के बावजूद फूल की सटीक आकृति बनाई और उसमें निर्धारित रंगों को बिल्कुल सीमा के भीतर भरा।
श्रेया चुक ने इस प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि यह केवल आँखों पर पट्टी बाँधने की विद्या नहीं है, बल्कि मन को स्थिर कर अंतरात्मा की आवाज़ सुनने का अभ्यास है। उन्होंने बताया कि प्राणायाम और विशेष ध्यान तकनीकों के ज़रिए आज्ञा चक्र को जागृत किया जाता है, जिससे बच्चों में ‘सही समय पर सही विचार’ आने की क्षमता बढ़ती है। इससे न केवल उनकी एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि परीक्षा के तनाव और गुस्से को कम करने में भी मदद मिलती है।
स्कूल की चेयरपर्सन मेघा भंडारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इन बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यदि ईश्वर ने उनसे एक शक्ति ली है, तो उन्हें कई अन्य विलक्षण शक्तियों से नवाज़ा भी है। उन्होंने समाज को संदेश दिया कि ये बच्चे बोझ नहीं, बल्कि देश का गौरव हैं। संस्था का लक्ष्य इन बच्चों को इतना सशक्त बनाना है कि भविष्य में वे डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक बनकर समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकें। कार्यशाला के अंत में बच्चों की इस विलक्षण कला को देखकर सभी उपस्थित लोगों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया।