हरियाणा के करनाल जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां स्वास्थ्य व्यवस्था और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करनाल के सिविल अस्पताल स्थित ट्रोमा सेंटर के बाहर एक बेंच पर लगभग 55 से 60 वर्षीय अज्ञात बुजुर्ग का शव मिला है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग पिछले दो दिनों से इसी बेंच पर बीमार और असहाय अवस्था में पड़े हुए थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन या किसी संस्था द्वारा समय पर सुध न लिए जाने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 और सिविल लाइन थाना पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने जब बुजुर्ग की जांच की, तो उनके पास से कुछ दवाइयां, कंबल और एक खाली चाय का कप बरामद हुआ। पुलिस का प्राथमिक अनुमान है कि मृतक बीमार थे और संभवतः इलाज की उम्मीद में अस्पताल आए थे, लेकिन बेंच पर लेटे-लेटे ही उनकी मृत्यु हो गई। शरीर पर किसी बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिससे कड़ाके की ठंड और उचित उपचार न मिलना ही मृत्यु का संभावित कारण माना जा रहा है।
मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले बुजुर्ग को बीमार हालत में देखा था और उन्हें खाना खिलाने का प्रयास भी किया था। उन्होंने स्थानीय सेवा समितियों और अस्पताल के कर्मचारियों को भी इस बारे में सूचित किया था कि बुजुर्ग की हालत खराब है और उन्हें आश्रम या वार्ड में भर्ती करने की आवश्यकता है। आरोप है कि डॉक्टर ने उन्हें देखकर वापस भेज दिया था और कोई प्रभावी उपचार नहीं दिया गया, जिसके चलते ठंड और बीमारी के कारण बुजुर्ग की जान चली गई।
जांच अधिकारी ने बताया कि मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में भिजवा दिया गया है। पुलिस ने शिनाख्त के लिए शव को अगले 72 घंटों तक सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है। पुलिस मृतक के पास मिले सामान और दवाइयों की पर्चियों के आधार पर उनके परिजनों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। यह घटना न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि समाज की गिरती संवेदनशीलता को भी दर्शाती है।