January 24, 2026
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करनाल के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक, दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। स्कूल परिसर में करनाल की पहली अत्याधुनिक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन लैब’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर करनाल के विधायक जगमोहन आनंद ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उनके साथ पूर्व मेयर रेनू बाला गुप्ता भी मौजूद रहीं। इस लैब का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें प्रायोगिक ज्ञान (Practical Knowledge) देना और भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना है।

उद्घाटन समारोह के दौरान विधायक जगमोहन आनंद ने स्कूल प्रबंधन की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज का युग तकनीक का युग है और एआई (AI) इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि अक्सर एआई को लेकर समाज में कई भ्रांतियां होती हैं, लेकिन यदि इसका सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो यह बच्चों के मानसिक विकास और शिक्षा के स्तर को कई गुना बढ़ा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस लैब के माध्यम से करनाल के बच्चे नई तकनीकों को सीखेंगे और देश-प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

यह लैब आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का एक बेहतरीन संग्रह है, जो किसी भी स्कूल स्तर पर दुर्लभ है। लैब में सीएनसी (CNC) लेजर मशीन, 3D प्रिंटर, विंड टनल, लेथ मशीन, मिलिंग मशीन, जिगसॉ मशीन, और टेलिस्कोप जैसे एडवांस इक्विपमेंट्स उपलब्ध हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने बहुत ही आत्मविश्वास के साथ मुख्य अतिथि और आगंतुकों को इन मशीनों की कार्यप्रणाली समझाई। नन्हे वैज्ञानिकों ने हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर, विंडमिल, रॉकेट लॉन्चर्स, ड्रोन, और ह्यूमन बॉडी एनाटॉमी जैसे वर्किंग मॉडल्स का प्रदर्शन किया।

कक्षा 1 से लेकर कक्षा 10वीं तक के छात्रों के लिए अब हर हफ्ते एक विशेष क्लास इस लैब में निर्धारित की जाएगी। यहाँ छात्र अपनी क्लासरूम लर्निंग को रियल लाइफ प्रोजेक्ट्स में लागू कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, छात्र अब केवल किताबों में न्यूटन के नियम या पास्कल का सिद्धांत नहीं पढ़ेंगे, बल्कि रॉकेट लॉन्चर और हाइड्रोलिक मशीनों के जरिए उसे साक्षात अनुभव भी करेंगे। लैब में मौजूद 3D पेन्स और प्रिंटर्स के जरिए बच्चे अपनी कल्पनाओं को भौतिक रूप (3D मॉडल्स) दे सकेंगे।

स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. सुमन मदान ने इस अवसर को स्कूल और छात्रों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य छात्रों को ‘फ्यूचर रेडी’ (भविष्य के लिए तैयार) बनाना है। यहाँ बच्चे तकनीक को सिर्फ इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि उसे बनाना (Create) सीखेंगे। इससे उनमें प्रॉब्लम सॉल्विंग और क्रिटिकल थिंकिंग जैसी स्किल्स विकसित होंगी।” वहीं, इंग्लिश एजुकेटर भूमिका ने कहा कि एआई आज हर क्षेत्र का मास्टर है, और हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे भी हर क्षेत्र में आगे रहें और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें।

छात्रों में इस नई लैब को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने बताया कि कैसे वे अब विंड टनल के जरिए हवा के दबाव को समझ सकते हैं या टेलिस्कोप के जरिए खगोलीय पिंडों को देख सकते हैं। यह पहल निश्चित रूप से करनाल की शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी और बच्चों को रटंत विद्या से दूर ले जाकर कौशल विकास (Skill Development) की ओर अग्रसर करेगी।

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