करनाल शहर में विकास के नाम पर चल रहे ‘सिंगल पिलर फ्लाईओवर’ के निर्माण ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। शहर के सबसे व्यस्त इलाके, पुराने बस स्टैंड के पास की सड़कें पूरी तरह से कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यह फ्लाईओवर शहर के यातायात को सुगम बनाएगा, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि लोगों को पैदल चलने तक में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
मौके पर मौजूद हालात बयां करते हैं कि निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक रास्तों और सड़कों के रखरखाव की पूरी तरह अनदेखी की गई है। फ्लाईओवर के नीचे की सड़कें बुरी तरह टूट चुकी हैं और बारिश के बाद वहां कीचड़ ही कीचड़ नजर आता है। राहगीरों, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों के लिए यहां से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे आए दिन यहां गिरकर चोटिल हो रहे हैं। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि उन्हें अपने सफेद जूते गंदे करके कीचड़ से निकलना पड़ा और हर कदम पर फिसलने का डर बना रहा।
इस अव्यवस्था का सबसे बुरा असर स्थानीय व्यापारियों पर पड़ा है। सड़कों की बदहाली के कारण ग्राहकों ने इस बाजार का रुख करना बंद कर दिया है, जिससे दुकानदारों का कारोबार पूरी तरह चौपट हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि वे सुबह से शाम तक खाली बैठे रहते हैं और किराए व कर्मचारियों का वेतन निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने निर्माण शुरू करने से पहले कोई ठोस योजना नहीं बनाई, जिसका खामियाजा अब उन्हें भुगतना पड़ रहा है। कई दुकानदार तो परेशान होकर अपनी दुकानें बंद करने या दूसरी जगह शिफ्ट करने पर मजबूर हो गए हैं।
यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है। संकरी और टूटी सड़कों के कारण यहां हर समय लंबा जाम लगा रहता है। एंबुलेंस और जरूरी काम से जाने वाले लोग घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं। एक व्यक्ति ने बताया कि उसे डॉक्टर के पास जाना था, लेकिन आधे घंटे से जाम में फंसा हुआ है। स्थानीय निवासियों ने पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ट्रैफिक पुलिस चालान काटने में व्यस्त रहती है, लेकिन जाम खुलवाने या यातायात को सुचारू करने के लिए कोई कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आता।
जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए आम जनजीवन को इस तरह अस्त-व्यस्त नहीं किया जाना चाहिए। लोगों ने तुलना करते हुए कहा कि दिल्ली, गुड़गांव और रोहतक जैसे शहरों में भी पुल बनते हैं, लेकिन वहां बैरिकेडिंग करके साइड की सड़कें साफ-सुथरी रखी जाती हैं ताकि आवागमन बाधित न हो। यहां न तो उचित बैरिकेडिंग है और न ही सड़कों की मरम्मत की जा रही है।
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे एसी कमरों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखें। उनकी मांग है कि जब तक फ्लाईओवर का काम चल रहा है, तब तक साइड की सड़कों को चलने लायक बनाया जाए और यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाए। जनता का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अव्यवस्था के कारण उन्हें नरकीय जीवन जीने पर मजबूर न किया जाए।