हरियाणा के करनाल में स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एक बार फिर अपनी बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सुर्खियों में है। ताजा मामला शिव कॉलोनी के एक 10 वर्षीय बच्चे से जुड़ा है, जो तीसरी मंजिल से पतंग लूटते समय नीचे गिर गया था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, बच्चे को अस्पताल में करीब दो से तीन घंटे तक बिना किसी प्राथमिक उपचार के तड़पना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने उपचार शुरू करने के बजाय उन्हें बाहर से सीटी स्कैन करवाकर लाने के लिए पर्ची थमा दी।
बच्चे के पिता और अन्य परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी बहुमंजिला इमारत और करोड़ों का बजट होने के बावजूद इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए न तो एक्सरे की सुविधा उपलब्ध है और न ही सीटी स्कैन की। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में अनुभवी डॉक्टरों की भारी कमी है और पूरा संस्थान केवल प्रशिक्षु छात्रों (स्टूडेंट्स) के भरोसे चल रहा है। विरोध के दौरान यह बात भी सामने आई कि स्टाफ का व्यवहार मरीजों और उनके तीमारदारों के प्रति बेहद अपमानजनक और असंवेदनशील है।
अस्पताल की इस बदहाली पर केवल इसी परिवार ने नहीं, बल्कि वहां मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों ने भी अपना गुस्सा जाहिर किया। एक अन्य महिला ने बताया कि उन्हें भी अपने मरीज का अल्ट्रासाउंड बाहर से करवाना पड़ा और रिपोर्ट आने के बाद ही भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह अस्पताल अब केवल एक ‘रेफरल सेंटर’ बनकर रह गया है, जहां गंभीर मामलों को सीधे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया जाता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने सरकार से मांग की है कि अस्पताल में रिक्त पड़े डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के पदों को जल्द भरा जाए। साथ ही, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी मशीनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए फिल्मों और ऑपरेटरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। वहां मौजूद एक बुजुर्ग ने कहा कि जब तक स्थानीय विधायक या उच्च अधिकारी खुद आकर व्यवस्थाओं का जायजा नहीं लेते, तब तक गरीबों को इसी तरह धक्के खाने पड़ेंगे। अस्पताल के भीतर फैले कथित कमीशनखोरी के खेल और अव्यवस्थाओं ने सरकारी दावों की हवा निकाल दी है।