हरियाणा के मुख्यमंत्री के गृह जनपद और पूर्व में ‘स्मार्ट सिटी’ का गौरव प्राप्त करने वाले करनाल शहर की सड़कों पर इन दिनों यातायात प्रबंधन की शर्मनाक तस्वीर देखने को मिल रही है। जहाँ एक ओर आम जनता द्वारा यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन तुरंत भारी-भरकम चालान काट देता है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा स्वयं ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर के विभिन्न मुख्य चौकों पर बनाई गई जेब्रा क्रॉसिंग पैदल यात्रियों के लिए सुविधा के बजाय मुसीबत का सबब बन गई हैं।
सच्चाई यह है कि शहर के कई महत्वपूर्ण चौकों, जैसे सेक्टर 13, 14, 32 और सेक्टर 8 के चौराहों पर जेब्रा क्रॉसिंग की डिजाइन और प्लेसमेंट बेहद त्रुटिपूर्ण है। उदाहरण के तौर पर, सेक्टर 13 के व्यस्त चौक पर यदि कोई पैदल यात्री जेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग कर सड़क पार करने की कोशिश करता है, तो वह सड़क के दूसरी ओर जाने के बजाय सीधे डिवाइडर पर लगी लोहे की ग्रिल से टकरा जाएगा। वहाँ सड़क पार करने के लिए कोई सुरक्षित निकास नहीं बनाया गया है।
इससे भी अधिक चौंकाने वाली स्थिति सेक्टर 32 के चौक पर देखने को मिली है। यहाँ जेब्रा क्रॉसिंग का अंत सीधे एक बिजली के खंभे और हाई-वोल्टेज ट्रांसफार्मर के सामने होता है। इसका अर्थ यह है कि नियम का पालन करने वाला पैदल यात्री सुरक्षित मार्ग पाने के बजाय दुर्घटना को निमंत्रण देने को मजबूर है। इसके अतिरिक्त, अधिकांश व्यस्त चौराहों पर ‘स्टॉप लाइन’ या तो बनाई ही नहीं गई है या वह पूरी तरह मिट चुकी है। स्टॉप लाइन न होने के कारण वाहन चालक लाल बत्ती होने पर सीधे जेब्रा क्रॉसिंग के ऊपर जाकर वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे पैदल यात्रियों के लिए सड़क पार करना असंभव हो जाता है।
स्थानीय निवासियों और दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन केवल चालान वसूलने में व्यस्त है, लेकिन बुनियादी ढांचे की इस बड़ी खामी की ओर किसी का ध्यान नहीं है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत खर्च किए गए करोड़ों रुपये के बावजूद, शहर के मुख्य केंद्रों पर यातायात संकेतों का ऐसा प्रबंधन ‘विकसित भारत’ और ‘स्मार्ट सिटी’ के दावों पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि इन गलत ट्रैफिक संकेतों को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया, तो ये शहर में बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं।