- श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रास लीला और रुक्मणी विवाह के प्रसंग सुनाए
सुख-समृद्धि एवं आपसी भाईचारे की कामना के लिए आयोजित करवाई जा रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण की रास पंचाध्यायी, कंस वध तथा रुक्मणी विवाह के प्रसंग सुनाए गए, जिन्हें श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से सुना। वृंदावन धाम से पधारे कथाव्यास पूज्य केशव आचार्य महाराज ने सरल शब्दों में कथा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मन को शांति मिलती है, बुरे विचार दूर होते हैं और जीवन को सही रास्ता मिलता है। कथा मनुष्य को धर्म, प्रेम और कर्तव्य का बोध कराती है।
आज के समय में भागवत कथा व्यक्ति को संयम, संस्कार और भक्ति से जोड़ती है
उन्होंने कहा कि आज के समय में भागवत कथा व्यक्ति को संयम, संस्कार और भक्ति से जोड़ती है। कथा के दौरान भजनों के समय महिलाएं श्रद्धा भाव से झूमती नजर आईं। पूरा पंडाल जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं ने शांतिपूर्वक कथा श्रवण किया। कथा श्री महाकाली महाकालेश्वर सिद्धपीठ मंदिर के आचार्य पंडित शुभम शास्त्री के सानिध्य में आयोजित की जा रही है। छठे दिन भी आयोजन स्थल पर व्यवस्था और अनुशासन बना रहा। इस अवसर पर श्री श्याम सेवा समिति तरावड़ी से जुड़े पदाधिकारियों ने मंच पर पहुंचकर कथाव्यास पूज्य श्री केशव आचार्य जी महाराज एवं पंडित शुभम शास्त्री को पटका पहनाकर सम्मानित किया और उनके धार्मिक योगदान की सराहना की।