हरियाणा के करनाल जिले की एकता कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा नानकसर में दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों और माता गुजरी जी के महान बलिदान को समर्पित 20वें विशाल समागम का आयोजन किया गया। यह समागम संत बाबा राम सिंह जी नानकसर सींघड़ा वालों की प्रेरणा से हर साल आयोजित किया जाता है, जिसमें भारी संख्या में संगत नतमस्तक होने पहुँचती है।
समागम के दौरान विशेष दीवान सजाए गए, जिसमें संत बाबा गुरमीत सिंह जी और अन्य महानुभावों ने हाजिरी भरी। रागी जत्थों और कथावाचकों ने कीर्तन व गुरुबाणी के माध्यम से साहिबजादों द्वारा दी गई शहादत के गौरवमयी इतिहास पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि पोष का यह महीना सिख इतिहास में शहादत का महीना माना जाता है, जिसमें गुरु के लाडलों ने धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते दीवारों में चुनवाए जाना स्वीकार किया, लेकिन झुकना स्वीकार नहीं किया। समागम में पहुँची संगत को संबोधित करते हुए संतों ने कहा कि हमें साहिबजादों के जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म और सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
इस धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक सेवा का भी अनूठा संगम देखने को मिला। गुरुद्वारा परिसर में निःशुल्क चिकित्सा शिविर और नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ डॉक्टरों की टीम ने संगत का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसके अलावा, मानवता की सेवा के लिए रक्तदान शिविर भी लगाया गया।
समागम के दौरान सेवादारों ने अटूट लंगर का प्रबंध किया था, जिसमें कड़ाके की ठंड को देखते हुए गर्म दूध और प्रसाद का वितरण किया गया। गुरुद्वारे के मुख्य मार्ग से लेकर पंडाल तक सेवादार बड़ी निष्ठा के साथ व्यवस्थाएं संभालते नजर आए। आयोजन समिति ने बताया कि यह समागम दो दिनों तक चलता है, जिसमें रात्रि और दिन के विशेष दीवान सजाए जाते हैं। संगत से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर साहिबजादों को नमन करें और गुरुबाणी श्रवण कर अपना जीवन सफल बनाएं।