March 16, 2026
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हरियाणा के करनाल जिले के मूनक गांव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। सात बहनों के इकलौते भाई, 25 वर्षीय राजू की एक सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब राजू अपने एक दोस्त के साथ बाइक पर सवार होकर अपनी बहन के घर से वापस लौट रहा था। घरौंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खरखेड़ी और मलकपुर के बीच एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि राजू ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जबकि उसका दोस्त पंकज गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है।

राजू के परिवार के लिए यह क्षति केवल एक सदस्य को खोना नहीं है, बल्कि उनके भविष्य के सभी सपनों का बिखर जाना है। राजू की शादी करीब दो साल पहले हुई थी और वर्तमान में उसकी पत्नी गर्भवती है। घर में कुछ ही दिनों बाद किलकारी गूंजने वाली थी और राजू पिता बनने वाला था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; अपनी संतान का चेहरा देखने से पहले ही राजू इस दुनिया को अलविदा कह गया। राजू के माता-पिता अत्यंत बुजुर्ग हैं और वह अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। सात बहनों के इकलौते भाई के चले जाने से बहनों के सिर से भाई का साया हमेशा के लिए उठ गया है।

हादसे की जानकारी देते हुए गांव के सरपंच और परिजनों ने बताया कि यह घटना रात करीब 10:30 बजे की है। ट्रैक्टर के पीछे सरसों निकालने वाली मशीन (थ्रेशर) बंधी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, ट्रैक्टर चालक तेज रफ्तार में था और लापरवाही से वाहन चला रहा था। टक्कर के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया, हालांकि पुलिस ने ट्रैक्टर का नंबर ट्रेस कर लिया है और चालक की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। राजू के शव का पोस्टमार्टम करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में किया जा रहा है।

इस दुर्घटना ने स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सड़क पर यह हादसा हुआ, वह अत्यंत संकरी और खराब स्थिति में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उस क्षेत्र को ‘भूतों वाली फाटक’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि वहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस ग्रामीण मार्ग पर स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। रात के समय अंधेरे और संकरी सड़क के कारण ब्लाइंड कट पर वाहनों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। खेतों का इलाका होने के कारण वहां अक्सर भारी कृषि मशीनरी और ट्रैक्टरों का आवागमन रहता है, लेकिन सुरक्षा के मानकों जैसे मार्किंग या इंडिकेशन बोर्ड का नितांत अभाव है।

राजू जैसे युवा और होनहार व्यक्ति का असमय जाना न केवल एक परिवार की तबाही है, बल्कि यह प्रशासनिक अनदेखी का भी परिणाम है। यदि संकरी सड़कों को चौड़ा किया गया होता या पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था होती, तो शायद राजू आज अपने होने वाले बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता के साथ होता। पुलिस ने मृतक के पिता शीशपाल की शिकायत पर ट्रैक्टर चालक के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। फिलहाल, पूरा गांव राजू के अंतिम दर्शनों और परिवार को इस असहनीय दुख से उबरने की शक्ति देने की प्रार्थना कर रहा है।

Ground Report By Bhavya Narang

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