वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस के पावन अवसर पर आज करनाल के सेक्टर 12 स्थित जाट भवन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने एकत्रित होकर महाराजा सूरजमल की स्मृति में हवन यज्ञ किया और उनके द्वारा राष्ट्र हित में दिए गए बलिदान को नमन किया। हवन के उपरांत आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने महाराजा के जीवन दर्शन और उनकी अजेय शक्ति पर विस्तार से प्रकाश डाला।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए जाट महासभा और महाराजा सूरजमल ऑर्गनाइजेशन (एमएसओ) के प्रतिनिधियों ने कहा कि महाराजा सूरजमल केवल भरतपुर के राजा नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसी महान विभूति थे जिन्होंने छोटे-छोटे गांवों और जागीरों को मिलाकर एक सशक्त साम्राज्य खड़ा किया। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि एकता में ही सबसे बड़ी ताकत है। महाराजा ने अपने जीवनकाल में करीब 80 युद्ध लड़े और वे एक अपराजित योद्धा के रूप में इतिहास में दर्ज हुए। उन्होंने हमेशा औरंगजेब जैसे शासकों के जुल्मों के खिलाफ लोहा लिया और सनातन संस्कृति की रक्षा की।
वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महाराजा सूरजमल ने केवल जाट समाज ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग और हर जाति के लोगों को संरक्षण दिया। उन्होंने मुगलों द्वारा लगाए गए अन्यायपूर्ण ‘जजिया कर’ के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई और तलवार के दम पर अपनी संस्कृति का बचाव किया। महाराजा के आदर्शों का जिक्र करते हुए बताया गया कि उन्होंने अपनी सेना को सख्त निर्देश दिए थे कि युद्ध के दौरान भी किसी धर्म या समाज के लोगों को आहत न किया जाए और न ही कोई लूटपाट की जाए।
आज के परिप्रेक्ष्य में युवाओं को संदेश देते हुए वक्ताओं ने कहा कि महाराजा के समय में सुरक्षा के लिए तीर और तलवारों की आवश्यकता थी, लेकिन आज के युग में ‘कलम’ ही सबसे बड़ा हथियार है। युवाओं से आह्वान किया गया कि वे शिक्षित होकर समाज की तरक्की में योगदान दें और महाराजा के स्वाभिमान एवं न्याय संहिता से प्रेरणा लें। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे आपसी भाईचारे और राष्ट्रभक्ति की भावना को सर्वोपरि रखेंगे। इस कार्यक्रम में महाराजा सूरजमल के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करने के साथ ही युवाओं को उनके गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराया गया।