- करीब पांच प्रतिशत युवा रक्तचाप, मधुमेह और अन्य बीमारी
करनाल : ब्रेकिंग न्यूज : जिले में बड़ी संख्या में युवा चाहकर भी रक्तदान नहीं कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और ब्लड बैंक के आंकड़े बताते हैं कि हर माह औसतन करीब आठ हजार लोग रक्तदान करने आते हैं। इनमें से 1500 से लेकर 2000 तक युवा रक्त की कमी के कारण रक्तदान नहीं कर पाते। यानी हर माह करीब 20 फीसदी युवाओं को लौटाना पड़ता है। करीब पांच प्रतिशत युवा रक्तचाप, मधुमेह और अन्य बीमारियों के कारण रक्तदान नहीं कर पाते।
पिछले कुछ वर्षों में ब्लड बैंकों में रक्त की मांग लगातार बढ़ी
पिछले कुछ वर्षों में ब्लड बैंकों में रक्त की मांग लगातार बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति नहीं बढ़ पा रही। अस्पतालों में दुर्घटना, ऑपरेशन, थैलेसीमिया, कैंसर और गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए रोजाना खून की जरूरत पड़ती है।
युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति रक्त की कमी का प्रमुख कारण
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. सचिन गर्ग ने बताया कि युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति रक्त की कमी का प्रमुख कारण बन रही है। तंबाकू, शराब, गुटखा, ई-सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों का नियमित सेवन शरीर को भीतर से कमजोर कर रहा है। इससे हीमोग्लोबिन का स्तर गिरता है और शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
नशा केवल रक्त की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है
उन्होंने बताया कि कई युवा खुद को फिट समझकर रक्तदान के लिए आते हैं, लेकिन जांच में उनका हीमोग्लोबिन तय मानक से कम निकलता है। ऐसे में उन्हें मजबूरी में लौटाना पड़ता है। नशा केवल रक्त की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।
लगातार बढ़ रही है खून की मांग
डॉ. सचिन गर्ग ने बताया कि हर रक्तदाता की जांच अनिवार्य है। रक्तदान से पहले हर व्यक्ति की पूरी मेडिकल जांच की जाती है। इसमें हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल, वजन आदि देखा जाता है। यदि किसी भी पैरामीटर में कमी पाई जाती है तो रक्तदान की अनुमति नहीं दी जाती। जो युवा तय मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें रक्तदान से रोका जाता है। यदि कोई व्यक्ति तीन महीने में एक बार संतुलित आहार ले, नशे से दूर रहे और नियमित व्यायाम करे तो उसका हीमोग्लोबिन स्तर बेहतर रह सकता है।