हरियाणा के करनाल जिले में स्थित इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) के क्षेत्रीय केंद्र के बाहर रविवार को छात्रों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से पहुंचे ये विद्यार्थी अपने असाइनमेंट जमा करने आए थे, लेकिन उन्हें वहाँ केवल ताले और सन्नाटे का सामना करना पड़ा। छात्रों का आरोप है कि उन्हें आधिकारिक तौर पर मैसेज भेजकर रविवार को असाइनमेंट जमा करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन जब वे लंबी दूरी तय कर यहाँ पहुंचे, तो कोई भी जिम्मेदारी लेने वाला मौजूद नहीं था।
असाइनमेंट जमा करने आए विद्यार्थियों की पीड़ा साझा करते हुए साहिल नामक छात्र ने बताया कि वह पिछले तीन सालों से अपनी बीए और अब एमए की असाइनमेंट इसी तरह रविवार को जमा करते आए हैं। इस बार भी उन्हें 31 मार्च की समय सीमा से पहले रविवार को उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। साहिल विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश से अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर आए थे, ताकि वे अपने शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित कर सकें। इसी तरह फतेहाबाद, जींद, पानीपत और कैथल से आए विद्यार्थियों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। कुरुक्षेत्र से अपनी नन्ही बेटी के साथ आए एक अभिभावक ने बताया कि उन्हें 6 मार्च को स्पष्ट मैसेज मिला था कि असाइनमेंट केवल रविवार को ही लिए जाएंगे, लेकिन अब अधिकारी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं।
दफ्तर के बाहर जमा हुए विद्यार्थियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। छात्रों का कहना है कि न केवल दफ्तर बंद है, बल्कि आधिकारिक मैसेज में दिए गए संपर्क नंबर भी स्विच ऑफ आ रहे हैं। दफ्तर के भीतर मौजूद कुछ कर्मचारियों ने पहले तो कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन जब विरोध बढ़ा तो उन्होंने गोल-मोल जवाब देते हुए छात्रों को दूसरे स्टडी सेंटरों पर जाने को कह दिया। कर्मचारियों का दावा था कि छात्रों को नए नियमों के तहत मैसेज भेजा जाएगा कि उनकी असाइनमेंट कहाँ जमा होगी। इस पर छात्रों ने तर्क दिया कि जब वे पहले से ही सैंकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं और हजारों रुपये किराया खर्च कर चुके हैं, तब उन्हें वापस भेजना उनके साथ नाइंसाफी है।
31 मार्च की समय सीमा नजदीक होने के कारण छात्रों में इस बात को लेकर भी डर है कि यदि समय पर असाइनमेंट जमा नहीं हुए, तो उनका पूरा साल खराब हो सकता है। इग्नू की प्रवेश परीक्षा और वार्षिक परीक्षाओं में बैठने के लिए असाइनमेंट का जमा होना अनिवार्य होता है। कई छात्राओं ने बताया कि वे अपने बच्चों और परिवार को छोड़कर यहाँ आई थीं, लेकिन यहाँ कोई भी उचित मार्गदर्शन देने वाला नहीं है। छात्रों का कहना है कि वे बार-बार दफ्तर के चक्कर नहीं लगा सकते क्योंकि वे दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं या नौकरीपेशा हैं।
मौके पर मौजूद इग्नू केंद्र के कर्मचारियों ने जब छात्रों से बात करने का प्रयास किया, तो वे कोई भी स्पष्ट तारीख या अगली प्रक्रिया बताने में असमर्थ रहे। उन्होंने केवल इतना कहा कि मुख्यालय से जो निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर सूचना दी जाएगी। हालांकि, छात्रों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यदि रविवार को अवकाश था, तो मैसेज भेजकर उन्हें क्यों बुलाया गया? फिलहाल, विद्यार्थी अपने हाथों में असाइनमेंट की फाइलें लेकर दफ्तर के बाहर खड़े हैं और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। यह घटना इग्नू जैसे बड़े संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्थाओं और छात्रों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।