समाज में फैली बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने के लिए एमडी बाल भवन (MDD Bal Bhawan) ने एक राष्ट्रव्यापी मुहिम ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के तहत हरियाणा में विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के अंतर्गत एक विशेष रथ हरियाणा के 15 जिलों के गांवों और शहरों में जाकर लोगों को बाल विवाह के कानूनी और सामाजिक परिणामों के प्रति सचेत कर रहा है। करनाल में रोड धर्मशाला पहुंचने पर रोड महासभा के सदस्यों ने इस यात्रा का भव्य स्वागत किया और हस्ताक्षर अभियान में भाग लेकर इस कुप्रथा को रोकने का संकल्प लिया।
जागरूकता अभियान के दौरान समाजसेवियों ने स्पष्ट किया कि भारत में विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में विवाह करना बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध है। इस अपराध के दोषी पाए जाने पर 2 साल की कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित, मौलवी, टेंट हाउस मालिक, हलवाई और बैंड वाले भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएंगे यदि वे जानते हुए भी बाल विवाह का हिस्सा बनते हैं।
मुहिम के दौरान वक्ताओं ने बाल विवाह के शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह से लड़कियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और वे शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। कई मामलों में कम उम्र की लड़कियों की शादी अधेड़ उम्र के व्यक्तियों से कर दी जाती है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। एमडी बाल भवन ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कहीं भी बाल विवाह हो रहा हो, तो वे तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 या पुलिस हेल्पलाइन 112 पर इसकी सूचना दें।
करनाल के विधायक जगमोहन आनंद और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुहिम का समर्थन किया है। रोड महासभा ने इस यात्रा को हरी झंडी दिखाकर शहर के अन्य हिस्सों के लिए रवाना किया। इस दौरान पुलवामा के शहीदों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई और युवाओं को राष्ट्र निर्माण व सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया गया। समाज के जागरूक नागरिकों का मानना है कि शिक्षा का दीप जलाकर ही बाल विवाह के अंधेरे को दूर किया जा सकता है।