करनाल की अल्फा इंटरनेशनल सिटी में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। शुक्रवार को जिला नगर योजनाकार (DTP) गुंजन वर्मा के निरीक्षण के दौरान कॉलोनी के निवासी और सिटी प्रबंधन के अधिकारी आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके चलते डीटीपी को हस्तक्षेप करना पड़ा। निवासियों ने जहां जर्जर सड़कों, बंद स्ट्रीट लाइटों और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के गंदे पानी की निकासी को लेकर गंभीर आरोप लगाए, वहीं प्रबंधन ने मेंटेनेंस शुल्क न मिलने को इन समस्याओं का मुख्य कारण बताया।
निरीक्षण के दौरान निवासियों ने दिखाया कि किस तरह एसटीपी का दूषित पानी खेतों और रिहायशी इलाकों के पास जमा हो रहा है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। एसोसिएशन के प्रधान ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जब तक कॉलोनी को पूर्ण रूप से ‘कंप्लीट’ (Completion Certificate) नहीं कर दिया जाता और बुनियादी सुविधाएं सुचारू नहीं होतीं, तब तक बिल्डर मेंटेनेंस शुल्क वसूलने का हकदार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डर अवैध रूप से मेंटेनेंस ले रहा है और लाइसेंस का रिन्यूअल भी नियमों के विरुद्ध हो रहा है।
दूसरी ओर, अल्फा सिटी के अधिकारियों ने पलटवार करते हुए कहा कि कॉलोनी के लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने मेंटेनेंस शुल्क नहीं चुकाया है, जिसके कारण करीब 15 करोड़ रुपये बकाया हैं। प्रबंधन का दावा है कि बिना फंड के इतनी बड़ी कॉलोनी का रख-रखाव और विकास कार्य करना संभव नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि निवासियों को मेंटेनेंस देना अनिवार्य है, तभी बिल्डर काम कर पाएगा।
डीटीपी गुंजन वर्मा ने दोनों पक्षों की बात सुनी और मौके पर ही प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि निवासियों की परेशानियां जायज हैं और सड़कों की हालत वाकई चिंताजनक है। डीटीपी ने अल्फा सिटी प्रबंधन को सात दिन का समय देते हुए सीएम विंडो पर दर्ज शिकायतों और निवासियों द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर लिखित जवाब और संबंधित दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रबंधन संतोषजनक जवाब और समाधान पेश नहीं करता है, तो विभाग सख्त कदम उठाएगा। निवासियों ने दो टूक कहा है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, वे सीएम विंडो की शिकायतों को बंद नहीं होने देंगे।