हरियाणा के करनाल सहित विभिन्न मैदानी इलाकों में मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। पिछले कुछ दिनों से जारी कड़ाके की ठंड और हाल ही में हुई हल्की रिमझिम बारिश गेहूं की फसल के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम गेहूं की खेती के लिए किसी अमृत से कम नहीं है, क्योंकि जितनी अधिक ठंड पड़ेगी, फसल की पैदावार और गुणवत्ता उतनी ही बेहतर होगी।
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते मैदानी इलाकों में शीतलहर का प्रकोप बढ़ा है। इस ठिठुरन भरी सर्दी का सीधा सकारात्मक प्रभाव गेहूं के पौधों पर पड़ रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गेहूं की फसल को दाने के भराव (Grain Filling) की प्रक्रिया तक कम तापमान की आवश्यकता होती है। वर्तमान में हो रही हल्की बारिश ने न केवल मिट्टी में आवश्यक नमी प्रदान की है, बल्कि यूरिया और अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण में भी मदद मिलेगी। फुहार के रूप में पड़ रही यह बारिश पौधों के स्वास्थ्य के लिए उत्तम है।
विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की भी सलाह दी है। किसानों को निर्देशित किया गया है कि वे खेतों में अतिरिक्त जलभराव न होने दें। यदि बारिश के कारण पानी जमा होता है, तो उसे तुरंत निचले क्षेत्रों की ओर निकाल देना चाहिए ताकि फसल में पीलापन न आए। इसके साथ ही, किसानों को अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करने को कहा गया है, विशेषकर उन फसलों का जहाँ पुराने बीजों का उपयोग किया गया है। पुराने बीजों में ‘पीला रतुआ’ (Yellow Rust) जैसे रोगों की संभावना अधिक होती है। यदि पत्तियों पर पीला पाउडर जैसा पदार्थ दिखाई दे, तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क करना चाहिए।
कृषि विभाग लगातार किसानों को नई और रोग-प्रतिरोधी प्रजातियों के प्रति जागरूक कर रहा है। विभाग का मानना है कि यदि आने वाले कुछ हफ्तों तक मौसम इसी प्रकार ठंडा बना रहता है, तो इस वर्ष गेहूं की बंपर पैदावार होने की प्रबल संभावना है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों के लिए यह मौसम एक सुखद संकेत लेकर आया है।