हरियाणा के करनाल जिले में आज बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित रहीं, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं। अपनी प्रमुख मांग ‘फाइव डे बैंकिंग’ (सप्ताह में पांच दिन काम) को लेकर बैंक कर्मी करनाल के सेक्टर 12 में एकत्रित हुए और सरकार व प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस हड़ताल के कारण चेक क्लियरेंस, नकद लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य बाधित रहे।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेताओं ने बताया कि बैंकिंग क्षेत्र में काम का दबाव निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब आरबीआई, एलआईसी, नाबार्ड और सरकारी विभागों (डीएफएस) में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है, तो सार्वजनिक बैंकों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है? कर्मचारियों का कहना है कि वे इस सुविधा के बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को भी तैयार हैं। उनका मानना है कि यदि कर्मचारियों को मानसिक शांति और आराम मिलेगा, तो वे ग्राहकों को और बेहतर सेवाएं दे पाएंगे।
हड़ताल के दौरान महिला कर्मचारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते मानसिक तनाव (स्ट्रेस) और डिप्रेशन के मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण एक व्यक्ति को तीन लोगों का काम करना पड़ रहा है, जिससे उनकी ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ पूरी तरह बिगड़ गई है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि नई भर्तियां न होने के कारण मौजूदा स्टाफ पर बोझ बढ़ाया जा रहा है और उनकी छवि जनता के सामने खराब की जा रही है।
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बैंकिंग काफी हद तक डिजिटल हो चुकी है, ऐसे में शनिवार की छुट्टी से ग्राहकों को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। हालांकि, हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे और जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कर्मचारी संघों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी वर्षों से लंबित मांगों पर जल्द विचार नहीं किया, तो वे भविष्य में और भी कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।