करनाल में बसंत पंचमी का त्योहार, जिसका इंतजार बच्चे और युवा पूरे साल बेसब्री से करते हैं, इस बार मौसम की बेरुखी का शिकार हो गया। सुबह से जारी बारिश और तेज हवाओं ने पतंगबाजी के शौकीनों के उत्साह पर पानी फेर दिया। शहर के कई इलाकों, विशेषकर पुरानी बसावट वाले क्षेत्रों जैसे भाटो मोहल्ला और झुंडला गेट के पास, जहां आमतौर पर बसंत पंचमी के दिन छतों पर तिल रखने की जगह नहीं होती थी, वहां आज सुबह निराशा छाई रही।
युवाओं ने इस दिन के लिए विशेष तैयारियां कर रखी थीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने हजारों रुपये खर्च कर पतंगे और डोर खरीदी थी। कई ग्रुप्स ने अपनी छतों पर बड़े डीजे सिस्टम और साउंड सेटअप लगवाए थे। खाने-पीने का भी पूरा इंतजाम था, जिसमें ब्रेड पकोड़े, समोसे, आलू के पराठे और रायता जैसे व्यंजन शामिल थे। एक उत्साही युवक ने बताया कि उसने और उसके दोस्तों ने करीब 35,000 रुपये का खर्चा किया था, जिसमें 10,000 रुपये की केवल डोर थी। कई लोग तो विशेष रूप से पांच दिन की छुट्टी लेकर केवल पतंग उड़ाने के लिए अपने घर आए थे।
हालांकि, दोपहर के समय बारिश थोड़ी थमी, जिससे बच्चों और युवाओं के चेहरों पर कुछ मुस्कान लौटी। लोग तुरंत अपनी छतों पर निकल आए और पतंग उड़ाने की कोशिश करने लगे। लेकिन तेज हवाओं ने उनकी कोशिशों को ज्यादा सफल नहीं होने दिया। पतंगे हवा के तेज बहाव में टिक नहीं पा रही थीं और कई बार अटक रही थीं। इसके बावजूद, युवाओं का जोश कम नहीं हुआ। पतंग न उड़ने पर उन्होंने डीजे पर डांस करके और शोर मचाकर त्योहार का आनंद लेने का फैसला किया। उनका कहना था कि धूप न निकले तो कोई बात नहीं, बस बारिश रुक जाए और हवा थोड़ी कम हो जाए ताकि वे अपनी तैयारी का लुत्फ उठा सकें।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अभी और बारिश होने की संभावना है, जो पतंगबाजों के लिए चिंता का विषय है। इसके बावजूद, शहरवासी हार मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यह त्योहार साल में एक बार आता है और वे इसे किसी भी हाल में मनाएंगे, चाहे मौसम साथ दे या न दे। उन्होंने सरकार से मजाकिया लहजे में “पतंगों के नुकसान की भरपाई” की मांग भी की।
इस दौरान चाइनीज डोर के इस्तेमाल को लेकर भी जागरूकता देखी गई। अधिकतर युवाओं ने बताया कि वे केवल सादे धागे का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि किसी पक्षी या इंसान को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने अन्य लोगों से भी अपील की कि वे खतरनाक चाइनीज डोर से बचें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। फिलहाल, करनाल के आसमान में रंग-बिरंगी पतंगे तो कम नजर आ रही हैं, लेकिन छतों से आती संगीत और मस्ती की आवाजें बता रही हैं कि मौसम का मिजाज चाहे जैसा भी हो, बसंत का उल्लास कम नहीं हुआ है।