करनाल कोर्ट में आज कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। करनाल बार एसोसिएशन के आह्वान पर वकीलों ने एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की और कामकाज को निलंबित कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन हाल ही में फतेहाबाद और समालखा में वकीलों के साथ हुए कथित पुलिसिया दुर्व्यवहार और बदसलूकी के विरोध में किया गया है। वकीलों की इस हड़ताल के कारण न्यायालय में अपने मामलों की सुनवाई और अन्य कार्यों के लिए आए आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
करनाल बार काउंसिल के प्रधान ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह हड़ताल पूरे हरियाणा स्तर पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों समालखा सब-डिवीजन में एक वकील के साथ झगड़ा हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने उल्टे वकील के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी। जब पीड़ित वकील ने दोषियों के खिलाफ शिकायत दी, तो प्रशासन ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस एकतरफा कार्रवाई के विरोध में समालखा में पिछले 10 दिनों से वकील हड़ताल पर हैं।
इसके अलावा, दो दिन पहले फतेहाबाद में भी एक घटना सामने आई, जहां एक डीएसपी के रीडर का पार्किंग को लेकर वकीलों के साथ विवाद हो गया। आरोप है कि इस मामले में भी पुलिस ने अपने कर्मचारी के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया। बार एसोसिएशन का कहना है कि जब कानून के रखवाले ही वकीलों के साथ अन्याय करेंगे, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा। वकीलों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि वह अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रही है और एक बुद्धिजीवी वर्ग (इंटेलेक्चुअल क्लास) को दबाने की कोशिश कर रही है।
विरोध प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिन की हड़ताल नहीं, बल्कि प्रशासन और पुलिस के लिए एक चेतावनी है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। वकीलों ने कहा कि वे अन्याय सहने वालों में से नहीं हैं, क्योंकि जो खुद अन्याय सहेगा, वह दूसरों को न्याय कैसे दिला पाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वकील कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं, लेकिन पुलिस कानून तोड़ रही है।
इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर देखने को मिला। दूर-दराज से अपनी तारीखों और अन्य कानूनी कार्यों के लिए कोर्ट पहुंचे लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। हालांकि, वकीलों का तर्क है कि वे जनता के लिए ही लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि समाज में वकीलों की भूमिका महत्वपूर्ण है और यदि वे ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो न्याय व्यवस्था चरमरा जाएगी। वकीलों ने याद दिलाया कि देश की आजादी में भी वकीलों का अहम योगदान रहा है।
करनाल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछली बार जब उन्होंने हड़ताल की कॉल दी थी, तो चीफ जस्टिस ने मामले का संज्ञान लिया था और तुरंत समाधान निकाला था। लेकिन इस बार अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है। इसी रोष में पूरे हरियाणा के जिला कोर्ट्स और सब-डिवीजन कोर्ट्स में कामकाज निलंबित रखा गया है।
फिलहाल, यह हड़ताल एक दिन के लिए घोषित की गई है, लेकिन वकीलों के तेवर बता रहे हैं कि यदि जल्द ही उनकी शिकायतों का निवारण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। वकीलों ने एक स्वर में कहा कि पुलिस को अपने व्यवहार में सुधार लाना होगा और वकीलों के साथ सम्मानजनक तरीके से पेश आना होगा। यह टकराव अब केवल एक या दो घटनाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह वकीलों के आत्म-सम्मान और सुरक्षा का प्रश्न बन गया है।