January 21, 2026
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बसंत पंचमी का त्योहार आने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। यह त्योहार उल्लास और उमंग का प्रतीक है, जिसमें बच्चे और युवा पतंगबाजी का आनंद लेते हैं। हालांकि, उत्सव की यह खुशी लापरवाही के कारण मातम में बदल सकती है। हरियाणा के करनाल से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां पतंग उड़ाते समय एक 10 वर्षीय मासूम अपनी जान जोखिम में डाल बैठा। यह घटना उन सभी अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति निश्चिंत हो जाते हैं।

करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में एक परिवार अपने 10 वर्षीय बच्चे, जगजीवन सिंह, के इलाज के लिए पहुंचा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा तब हुआ जब बच्चा अपने घर की तीसरी मंजिल पर पतंग उड़ा रहा था। खेल-खेल में संतुलन बिगड़ने से वह सीधे नीचे आ गिरा। इस दुर्घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और आनन-फानन में बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया।

घायल बच्चे के परिजन इस घटना से गहरे सदमे में हैं। अस्पताल में मौजूद बच्चे के मामा और अन्य रिश्तेदारों ने मीडिया के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि अक्सर बच्चे पतंग उड़ाने की धुन में अपनी सुरक्षा को भूल जाते हैं। बच्चे के परिजन ने बताया कि वे अपने घर पर थे जब उन्हें इस हादसे की सूचना मिली। उन्होंने अन्य अभिभावकों से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे अपने बच्चों को छतों पर अकेला न छोड़ें। यदि बच्चे पतंग उड़ाना भी चाहते हैं, तो किसी बड़े भाई-बहन या माता-पिता की निगरानी में ही ऐसा करें।

परिजनों ने विशेष रूप से ‘चाइना डोर’ के खतरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाजार में बिकने वाली यह धारदार डोर न केवल पक्षियों के लिए बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को इस तरह की खतरनाक डोर से दूर रखना चाहिए और भारतीय धागे या रील का ही उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो पतंग छत की बजाय नीचे खुले मैदान में उड़ाई जाए ताकि ऊंचाई से गिरने का खतरा न रहे।

यह केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि बसंत पंचमी के आसपास ऐसे हादसे अक्सर सुनने को मिलते हैं। बच्चे कटी हुई पतंग को लूटने के लिए बेतहाशा सड़कों और हाईवे पर दौड़ते हैं। इस दौरान उनका ध्यान आने-जाने वाले वाहनों पर नहीं होता, जिससे वे भीषण दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। कई बार पतंग लूटने के चक्कर में बच्चे गड्ढों में गिर जाते हैं या गाड़ियों की चपेट में आ जाते हैं।

चिकित्सकों और प्रशासन ने भी बार-बार यह चेतावनी दी है कि बच्चों को सड़कों पर पतंग लूटने से रोका जाए। 23 जनवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में यह प्रत्येक माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को समझाएं और उन पर कड़ी नजर रखें। उत्सव का आनंद तभी है जब वह सुरक्षित हो। जगजीवन सिंह के परिवार के साथ हुआ यह हादसा एक सबक है कि थोड़ी सी लापरवाही किसी के घर के चिराग को खतरे में डाल सकती है।

इस समय घायल बच्चे का इलाज जारी है और पूरा परिवार उसकी सलामती की दुआ कर रहा है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे इस संदेश को गंभीरता से लें ताकि किसी और के घर में ऐसी अनहोनी न हो।

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