करनाल शहर की ऐतिहासिक धरोहर और सुंदरता का प्रतीक माना जाने वाला क्लॉक टावर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। किसी समय शहर के केंद्र और लोगों के आकर्षण का मुख्य बिंदु रहने वाला यह स्मारक अब प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है। महर्षि वाल्मीकि चौक, जिसे पहले कमेटी चौक के नाम से भी जाना जाता था, वहां स्थित यह क्लॉक टावर वर्तमान में खंडित अवस्था में है और इसकी सुंदरता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
स्मारक की स्थिति इतनी चिंताजनक है कि क्लॉक टावर पर स्थापित भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा धूल की परतों से ढकी हुई है और कई स्थानों से खंडित हो चुकी है। इतना ही नहीं, टावर पर बनी तिरंगे की आकृति और अशोक चक्र भी उपेक्षा के कारण टूट-फूट का शिकार हो गए हैं। स्थानीय लोगों और बुजुर्गों का कहना है कि यह टावर लगभग 35-40 साल पहले बनाया गया था और शुरुआती कुछ वर्षों तक इसने शहर की सुंदरता में चार चांद लगाए थे, लेकिन लंबे समय से इसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है।
वर्तमान में शहर में चल रहे सिंगल पिलर फ्लाई ओवर के निर्माण कार्य ने इस स्मारक की स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। निर्माण कार्य से उड़ने वाली निरंतर धूल ने पूरे ढांचे को मटमैला कर दिया है। क्लॉक टावर की घड़ी, जो कभी समय का सटीक बोध कराती थी, पिछले कई वर्षों से बंद पड़ी है। टावर के ऊपरी हिस्सों पर पीपल के पेड़ उग आए हैं, जो इसकी संरचना को और अधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि ऐतिहासिक धरोहर की ऐसी दुर्दशा देखकर मन बहुत दुखी होता है। प्रशासन द्वारा सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। दुकानदारों का मानना है कि निर्माण कार्य अपनी जगह ठीक है, लेकिन मूर्तियों और राष्ट्रीय प्रतीकों की सफाई एवं रखरखाव प्रशासन की जिम्मेदारी है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन इसकी देखरेख नहीं कर सकता, तो ऐसे प्रतीकों को स्थापित करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। यह स्मारक न केवल करनाल के इतिहास का हिस्सा है, बल्कि शहरवासियों की भावनाओं से भी जुड़ा है, जिसकी सुरक्षा और पुनरुद्धार अब समय की मांग है।