हरियाणा के करनाल में विभिन्न ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर आगामी 12 फरवरी को ‘भारत बंद’ और देशव्यापी हड़ताल का औपचारिक ऐलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन में बैंक, बीमा, रेलवे, केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ संयुक्त किसान मोर्चा भी पूरी सक्रियता से शामिल होगा। संगठनों का आरोप है कि सरकार लगातार कर्मचारी, किसान और मजदूर विरोधी नीतियां बना रही है, जिससे समाज के हर वर्ग में गहरा रोष व्याप्त है।
बैठक के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल ऐतिहासिक होगी क्योंकि इसमें पहली बार इतनी बड़ी संख्या में विविध संगठन एक साथ आ रहे हैं। विरोध के मुख्य मुद्दों में बिजली बिल 2025 की वापसी, नए लेबर कोड को निरस्त करना, एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी लागू करना और खाली पड़े सरकारी पदों को भरना शामिल है। इसके अलावा, कर्मचारी संगठन कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और सभी के लिए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये निर्धारित करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने भी इस बंद को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। किसान नेताओं का कहना है कि वे कर्मचारियों और मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और सरकार की जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे। संगठनों ने मनरेगा योजना के स्वरूप और नाम में बदलाव के साथ-साथ बीपीएल कार्डों के कटने और बुढ़ापा पेंशन बंद होने जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा है।
रणनीति के तहत, अब ब्लॉक और गांव स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा ताकि 12 फरवरी के बंद को सफल बनाया जा सके। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया, तो इस देशव्यापी हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होगी। करनाल में इस विरोध प्रदर्शन को बड़े स्तर पर आयोजित करने के लिए 15 से 20 बड़े प्रदर्शनों का लक्ष्य रखा गया है, ताकि सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई जा सके।