करनाल के प्रतिष्ठित अरविंद हॉस्पिटल में ‘नी अर्थराइटिस अवेयरनेस वीक’ का आयोजन किया गया है, जिसके तहत घुटनों और जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों के लिए एक विशेष पहल की गई है। इस कार्यक्रम के माध्यम से मरीजों को एक सप्ताह तक मुफ्त परामर्श (ओपीडी) की सुविधा दी जा रही है। अस्पताल के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ (सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन) डॉ. वरुण गौतम ने नी अर्थराइटिस और इसके उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की।
डॉ. वरुण गौतम के अनुसार, नी अर्थराइटिस मुख्य रूप से बढ़ती उम्र से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें घुटने के जोड़ों के बीच का कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है। इसके कारण हड्डियां आपस में टकराती हैं, जिससे तेज दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई होती है। डॉक्टर ने बताया कि महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक और कम उम्र में देखी जाती है। इसके मुख्य कारणों में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव, खान-पान में प्रोटीन की कमी और प्रेगनेंसी के बाद वजन का बढ़ना शामिल है।
उपचार के बारे में बात करते हुए डॉ. गौतम ने स्पष्ट किया कि हर मरीज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। बीमारी के शुरुआती चरणों (माइल्ड टू मॉडरेट) में जीवनशैली में बदलाव, फिजियोथेरेपी, पीआरपी इंजेक्शन और स्टेम सेल थेरेपी जैसे गैर-सर्जिकल तरीकों से उपचार संभव है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास हमेशा घुटने को बचाने (नी प्रिजर्वेशन) का रहता है।
जिन मरीजों को सीवियर अर्थराइटिस होता है, उनके लिए नी रिप्लेसमेंट सर्जरी एक प्रभावी समाधान है। डॉ. गौतम ने इस मिथक को दूर किया कि इसमें पूरा घुटना बदल दिया जाता है। उन्होंने समझाया कि यह वास्तव में ‘नी रिसरफेसिंग’ प्रक्रिया है, जिसमें केवल खराब हो चुकी सतह को हटाकर मेटल कैप लगाई जाती है। आधुनिक ‘मिनिमल इनवेसिव टेक्निक’ के माध्यम से मांसपेशियों को काटे बिना सर्जरी की जाती है, जिससे मरीज उसी दिन चलने-फिरने में सक्षम हो जाता है।
अस्पताल में मौजूद पूर्व मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए और डॉ. वरुण गौतम की कार्यशैली और देखभाल की सराहना की। डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्जरी के बाद मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं और स्विमिंग या टेबल टेनिस जैसे खेल खेल सकते हैं, हालांकि फुटबॉल जैसे भारी खेलों से बचना चाहिए। घुटनों की किसी भी समस्या के समाधान के लिए मरीज आगामी एक सप्ताह तक सुबह 9 से शाम 4 बजे के बीच अस्पताल में निशुल्क परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।