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करनाल ब्रेकिंग न्यूज की टीम ने सदर बाजार से ‘गोल्ड’ नाम से बिक रही प्रतिबंधित चाइनीज डोर खरीदी।
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दुकानदार 350 से 600 रुपये तक में धड़ल्ले से बेच रहे हैं ओरिजिनल और डुप्लीकेट चाइनीज डोर।
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बेजुबान पक्षियों और इंसानों के लिए काल बन रही इस डोर पर रोक लगाने में प्रशासन नाकाम।
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वसंत पंचमी तक जारी रहेगा जागरूकता अभियान; लोगों से चाइनीज डोर के बहिष्कार की अपील।
करनाल का हृदय स्थल माना जाने वाला सदर बाजार इन दिनों मौत का सामान बेचने का केंद्र बना हुआ है। प्रतिबंधित होने के बावजूद बाजार में चाइनीज डोर धड़ल्ले से बेची जा रही है। इस जानलेवा कारोबार का पर्दाफाश करने के लिए करनाल ब्रेकिंग न्यूज की टीम ने स्वयं ग्राहक बनकर सदर बाजार का रुख किया और बिना किसी रोक-टोक के चाइनीज डोर खरीदी। टीम ने पाया कि दुकानदार इसे ‘गोल्ड’ और ‘मोनोकाइट’ जैसे गुप्त नामों से बेच रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस जानलेवा डोर में भी अब ओरिजिनल और डुप्लीकेट जैसी वैरायटी पेश की जा रही है। जहां डुप्लीकेट डोर 350 रुपये में उपलब्ध है, वहीं तथाकथित ओरिजिनल चाइनीज डोर के लिए 600 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यह डोर नायलॉन या प्लास्टिक जैसे मजबूत धागे से बनी होती है, जो टूटने के बजाय खिंचती जाती है। यही कारण है कि यह किसी भी पक्षी या इंसान की गर्दन पर पड़ते ही उसे चाकू की तरह काट देती है।
बाजार में खरीदारी करने आए स्थानीय नागरिकों और छोटे बच्चों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि दोपहिया वाहनों पर चलते समय यह डोर गर्दन में फंसकर जानलेवा साबित होती है। बिजली के तारों में फंसने के बाद यह डोर कई दिनों तक लटकी रहती है, जो बेजुबान पक्षियों के पंख काटने और उनके फंसकर मरने का सबसे बड़ा कारण बनती है।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। वसंत पंचमी का त्योहार नजदीक है और हर साल इस डोर की वजह से दर्जनों लोग घायल होते हैं या जान गंवाते हैं। इसके बावजूद सदर बाजार में यह डोर खुलेआम बिक रही है। व्यापारियों का तर्क है कि जब तक पीछे से सप्लाई बंद नहीं होगी और लोग मांग करेंगे, तब तक यह बिकती रहेगी। हालांकि, कुछ दुकानदारों ने इसका बहिष्कार करने की बात भी कही है।
इस मुहिम के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि वह जल्द से जल्द बाजार में छापेमारी कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। साथ ही, आम जनता से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को इस जानलेवा धागे से दूर रखें और त्योहार मनाने के लिए केवल सूती धागे (मंझ) का ही उपयोग करें। 23 जनवरी यानी वसंत पंचमी तक यह जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि किसी भी निर्दोष की जान इस प्लास्टिक डोर की भेंट न चढ़े।