January 7, 2026
31 Dec 10

हरियाणा पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह आज अपने 33 वर्षों से अधिक के लंबे और गौरवशाली पुलिस करियर के बाद सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर करनाल के मधुबन पुलिस एकेडमी में एक गरिमामयी विदाई समारोह और सम्मान परेड का आयोजन किया गया। 1992 बैच के इस वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने अपने विदाई संबोधन में सेवा के प्रति अपने अटूट समर्पण को साझा करते हुए “रिटायरमेंट” की पारंपरिक धारणा को सिरे से खारिज कर दिया।

समारोह को संबोधित करते हुए ओपी सिंह ने कहा कि वह खुद को ‘रिटायर्ड’ कहलाना पसंद नहीं करते। उनके अनुसार, उन्होंने केवल सरकार की एक भूमिका से निकास किया है, लेकिन एक सजग नागरिक और समाज के प्रति समर्पित व्यक्ति के रूप में उनका दायित्व कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि अच्छा काम करने के लिए किसी विशेष पद या शक्ति की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि इसके लिए केवल सेवा भाव और संकल्प की जरूरत है।

ओपी सिंह का सेवाकाल विविधताओं और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भरा रहा है। उन्होंने कैथल, पानीपत, जींद और हिसार जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अंबाला, पंचकूला और फरीदाबाद में पुलिस आयुक्त के रूप में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई। उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि खेल विभाग में प्रधान सचिव के रूप में रही, जहाँ उन्होंने राज्य की खेल नीतियों को नया आयाम दिया।

समारोह के दौरान उनकी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि उन्हें वर्ष 2008 और 2017 में विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने साइबर अपराध, नारकोटिक्स कंट्रोल और फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में भी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर हरियाणा पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवा पुलिस अधिकारियों को “मजदूर की मानसिकता” के साथ काम करने की सलाह दी, जिसका अर्थ है कि पद चाहे जो भी मिले, पूरी मेहनत और ईमानदारी से उसे निभाना चाहिए। उन्होंने पुलिस बल को अपनी ‘फौज’ बताते हुए कहा कि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जो समाज के लिए ऑक्सीजन की तरह महत्वपूर्ण है। विदाई के भावुक क्षणों में उन्होंने एकेडमी की व्यवस्था और परेड की सुंदरता की सराहना की और भविष्य में भी पुलिस संस्थान और शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान देते रहने का वादा किया।

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