हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने अपने ही विभाग में एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच में लगभग 1500 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक पत्र लिखकर विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
घोटाले की कार्यप्रणाली का विवरण देते हुए बताया गया कि यह मामला मुख्य रूप से निर्माण श्रमिकों (कंस्ट्रक्शन लेबर) के पंजीकरण और वेरिफिकेशन से जुड़ा है। सरकार पंजीकृत श्रमिकों को कई कल्याणकारी योजनाएं प्रदान करती है, जिसमें बच्चों की पीएचडी तक की शिक्षा का खर्च, शादी के लिए आर्थिक सहायता, प्रसूति लाभ और बीमारी के इलाज के लिए सहायता शामिल है। इन लाभों को प्राप्त करने के लिए श्रमिक का विभाग में पंजीकृत होना अनिवार्य है और पंजीकरण के लिए एक सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है।
मंत्री अनिल विज ने कार्यभार संभालते ही इस मामले में विसंगतियां देखीं। उन्हें पता चला कि कुछ अधिकारियों ने एक ही दिन में हजारों की संख्या में वेरिफिकेशन किए थे, जो मानवीय रूप से असंभव था। संदेह होने पर पहले तीन जिलों की संक्षिप्त जांच कराई गई, जहां गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद पूरे प्रदेश में जांच के आदेश दिए गए। श्रम विभाग में पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण सभी जिला उपायुक्तों (DC) को पत्र लिखकर तीन-सदस्यीय समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए। इन समितियों को श्रमिकों के घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करने का कार्य सौंपा गया।
वर्तमान में प्रदेश के 13 जिलों की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, जबकि 9 जिलों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। अब तक के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जांच में पाया गया कि लगभग 5,99,758 वर्कशीट्स में से केवल 53,249 ही वैध पाई गईं, बाकी सभी अवैध हैं। इसी तरह, 2,21,517 पंजीकृत श्रमिकों में से केवल 1,42,404 श्रमिक ही वास्तविक और वैध पाए गए। इसका सीधा अर्थ यह है कि बड़ी संख्या में अपात्र लोग और फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की राशि डकारी जा रही थी।
जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि यह फर्जीवाड़ा कब से चल रहा था, किन-किन लोगों ने फर्जी पर्चियां बनवाईं और किन अधिकारियों ने उन्हें सत्यापित किया। आशंका जताई जा रही है कि जैसे-जैसे बाकी जिलों की रिपोर्ट आएगी, घोटाले की राशि और भी अधिक बढ़ सकती है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।