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जिला सचिवालय के सामने फुटपाथ पर बैठे जेबीटी शिक्षकों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। पहले दिन गुरुवार को 17 शिक्षकों को फूल मालाएं डालकर अनशन पर बिठाया गया। इन शिक्षकों में सत्यवान, सचिन, वीर सिंह, सोनू कुंडू, महेश, पंकज रानी, राज कुमार, सीमा रानी, सुनीता, ऋषिपाल, ब्रह्मप्रकाश, सूरज प्रकाश, कृष्ण, वीरेंद्र, सोनू, सुशील व कुलदीप शामिल हैं। शिक्षकों के परिवार के लोग भी बच्चों के साथ धरना स्थल पर पहुंचना शुरू हो गए हैं। पीडि़त शिक्षकों के परिजनों का कहना है कि उनके बेटे बेटियों के साथ सरकार ने अन्याय किया है। पढ़ लिखकर शिक्षक बने युवाओं पर सरकार अत्याचार कर रही है। पूरी योग्यता रखने वाले शिक्षकों को परीक्षा पास करने के बाद ही नौकरी पर रखा गया था। अचानक एक महीने बाद 1259 युवा शिक्षकों को नौकरी से निकालना कानून का उल्लंघन है। इधर महिला शिक्षकों ने कहा कि जब तक नौकरी नहीं मिल जाती वह भूख हड़ताल पर बैठी रहेंगी और चुन्नी भी नहीं ओढ़ेंगी। चुन्नियां उतार कर धरना स्थल पर रख दी हैं। इस मौके पर मुकेश डिडवानिया और राकेश जांगड़ा ने कहा कि 2011 में पात्रता परीक्षा पास और विज्ञापन तीथि तक हर प्रकार की योग्यता पूरी करने वालों को नौकरी से निकाला गया है। यह सरकार की घटिया मानसिकता है। जबकि सरकार ने 2013 पात्रता पास केंडिटे जोकि विज्ञापन तिथि के बाद के थे, उन्हें नौकरी दे दी गई। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशो का उल्लंघन है। आज तक पूरे भारत में कहीं भी ऐसा नहीं हुआ जो हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग ने किया है। अब शिक्षक ज्वाइनिंग लेटर लेने के बाद ही अनशन समाप्त करेंगे।

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