हरियाणा की राजनीति में इन दिनों भ्रष्टाचार और विशेष रूप से धान घोटाले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। कुरुक्षेत्र के थानेसर से वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक अशोक अरोड़ा ने इस पूरे मामले पर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, प्रदेश में भ्रष्टाचार अपनी सीमाएं लांघ चुका है और अब समय आ गया है कि इसकी निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को कमान सौंपी जाए।
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्ष पूरी तरह से आक्रमक मुद्रा में नजर आ रहा है। अशोक अरोड़ा ने राज्यपाल के अभिभाषण को सरकार द्वारा लिखा गया एक औपचारिक दस्तावेज करार दिया, जिसमें जनता की मूल समस्याओं की अनदेखी की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल के पास वही पढ़ने की मजबूरी थी जो सरकार ने उन्हें लिख कर दिया था। अरोड़ा के अनुसार, इस अभिभाषण में स्वास्थ्य क्षेत्र की बदहाली और उन लाखों कर्मचारियों के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है जो सरकार को चलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा करते हुए विधायक ने करनाल और आसपास के क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कई अनाज मंडियों के सचिवों और निरीक्षकों की गिरफ्तारियां हुई हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि घोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं। करनाल, निसिंग, असंध और जुंडला जैसी मंडियों में अधिकारियों की धरपकड़ केवल “छोटी मछलियों” तक सीमित है। अरोड़ा का आरोप है कि यह धान घोटाला पिछले 10 वर्षों से एक सुव्यवस्थित तरीके से चल रहा है और इसमें बड़े राजनेताओं की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।
अशोक अरोड़ा ने केंद्र सरकार के दोहरे मापदंडों पर भी निशाना साधा। उन्होंने तर्क दिया कि यदि केंद्र सरकार पंजाब में 10,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से करवा सकती है, तो हरियाणा के इस करोड़ों रुपये के धान घोटाले की जांच सीबीआई को क्यों नहीं सौंपी जा रही? उन्होंने मांग की कि इस मामले की तह तक जाकर उन सभी सफेदपोश चेहरों को बेनकाब किया जाना चाहिए जिन्होंने किसानों और सरकारी खजाने को लूटा है।
शिक्षा, चिकित्सा और सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकार को आईना दिखाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है और थानों में पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं है। ऐसी स्थिति में सरकार जनता को बेहतर जीवन का सपना कैसे दिखा सकती है? उन्होंने अवैध कॉलोनियों के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। अरोड़ा ने कहा कि सरकार ने ‘दीनदयाल’ जैसे पवित्र नाम का उपयोग कर कॉलोनियां काटने का काम निजी हाथों में सौंप दिया है, जो केवल लूट का एक जरिया बन गया है। उन्होंने पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के समय की ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ नीति और ड्रा के माध्यम से गरीब तबके को प्लॉट देने की व्यवस्था को फिर से लागू करने की वकालत की।
आगामी विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष कुरुक्षेत्र सहित पूरे प्रदेश के जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। अशोक अरोड़ा ने साफ कर दिया है कि यदि बजट में जनता की उम्मीदों और उनके हितों का ध्यान नहीं रखा गया, तो सदन के भीतर और बाहर पुरजोर विरोध किया जाएगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई अब केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे तार्किक परिणति तक ले जाने के लिए कांग्रेस प्रतिबद्ध है।