हरियाणा के करनाल जिले में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख देखने को मिल रहा है। मेरठ रोड पर स्थित दर्जनों अवैध ढाबों और दुकानों पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुड्डा) की गाज गिरी है। हुड्डा द्वारा जारी किए गए अंतिम नोटिस और कड़े निर्देशों के बाद, ढाबा संचालकों और छोटे दुकानदारों ने स्वयं ही सरकारी जमीन खाली करनी शुरू कर दी है। सालों से इस मार्ग की पहचान बन चुके ये ढाबे अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहे हैं, जिससे दर्जनों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
मेरठ रोड से गुजरते समय देवीलाल चौक के पास एक तरफ ढाबों की लंबी कतार नजर आती थी, जहां लगभग 20 से अधिक ढाबे और खाने-पीने की दुकानें संचालित थीं। हुड्डा के अधिकारियों ने लगभग चार दिन पहले इन संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे इस जगह को तुरंत खाली कर दें। प्रशासन का आरोप था कि यह जमीन अवैध कब्जे के तहत आती है और इससे क्षेत्र का माहौल भी प्रभावित हो रहा था। अधिकारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि यदि दी गई समय सीमा के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया, तो विभाग अपनी लेबर और जेसीबी (पीला पंजा) के साथ आएगा और सामान जब्त कर लिया जाएगा।
हैरानी की बात यह है कि इस कार्रवाई से प्रभावित कई दुकानदार यहां पिछले 25 से 30 वर्षों से अपना व्यापार कर रहे थे। एक स्थानीय ढाबा संचालक ने बताया कि वह 1998 से यहां एक छोटा खोखा चला रहा था, जो उसके परिवार के पालन-पोषण का एकमात्र जरिया था। कुछ दुकानदारों का दावा है कि 2012 से पहले यह जमीन निजी थी और वे बाकायदा इसका किराया देते थे। हालांकि, 2012 में हुड्डा ने ग्रीन बेल्ट विकसित करने के नाम पर इस पूरी जमीन को अधिग्रहित (Acquire) कर लिया। तब से यह क्षेत्र सरकारी रिकॉर्ड में अवैध कब्जे के रूप में दर्ज हो गया और समय-समय पर यहां से हटने के नोटिस मिलते रहे।
आज की निर्धारित अंतिम तिथि तक ढाबा संचालकों ने विरोध के बजाय नियम का पालन करना ही उचित समझा। उन्होंने अपने अस्थायी निर्माण, शटर और टेंट स्वयं ही उखाड़ लिए। संचालकों का कहना था कि प्रशासन की मशीनरी चलने पर उनके सामान का भारी नुकसान होता, इसलिए उन्होंने स्वयं ही जगह खाली कर दी। इस कार्रवाई के कारण लगभग 70 से 80 लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। इनमें से कई लोग उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आकर यहां बसे थे और सस्ते किराए के कारण उन्होंने यहां अपना व्यापार जमाया था।
प्रभावित दुकानदारों की मुख्य चिंता यह है कि इतने वर्षों में उनके ग्राहक यहीं बंधे हुए थे। उनका कहना है कि अगर सरकार उन्हें कहीं और जगह दे भी देती है, तो नए सिरे से व्यापार शुरू करना और ग्राहक बनाना उनके लिए बहुत चुनौतीपूर्ण होगा। वर्तमान में इन लोगों के पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं बचा है। प्रशासन का कहना है कि ग्रीन बेल्ट की जमीन को अतिक्रमण मुक्त रखना शहर के सौंदर्यकरण और विकास के लिए आवश्यक है। फिलहाल, हुड्डा की टीम मौके पर मौजूद है और यह सुनिश्चित कर रही है कि पूरी जगह पूरी तरह से साफ हो जाए ताकि वहां योजना के अनुसार कार्य शुरू किया जा सके।