करनाल के जिला सचिवालय के बाहर आज किसानों का भारी आक्रोश देखने को मिला। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी ग्रुप) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए और भारत सरकार के साथ-साथ अमेरिकी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों की नाराजगी का मुख्य केंद्र भारत और अमेरिका के बीच होने वाला व्यापारिक समझौता (ट्रेड डील) है। विरोध स्वरूप किसानों ने भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संयुक्त पुतला फूंका और इस समझौते को किसानों की बर्बादी का दस्तावेज करार दिया।
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार पिछले दरवाजे से एक ऐसा समझौता लागू करने की कोशिश कर रही है, जो भारतीय कृषि और व्यापारिक ढांचे को जड़ से खत्म कर देगा। किसानों का तर्क है कि यदि यह ट्रेड डील लागू होती है, तो अमेरिका से आने वाला कृषि उत्पाद और अन्य माल भारतीय बाजारों में बेहद सस्ती कीमतों पर उपलब्ध होगा। अमेरिकी सरकार द्वारा अपने किसानों को दी जाने वाली भारी सब्सिडी के कारण वहां का माल हमारी लागत से भी कम दाम पर बिकेगा। ऐसी स्थिति में भारत का छोटा किसान, मजदूर और स्थानीय व्यापारी पूरी तरह से प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे और उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के पूरे आर्थिक स्वाभिमान पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुँचाने के लिए आम किसानों की बलि चढ़ा रही है। किसानों ने नारेबाजी करते हुए मांग की कि अमेरिका के साथ होने वाले इस व्यापारिक समझौते को तुरंत रद्द किया जाए। किसानों का मानना है कि विदेशी माल की आवक से घरेलू बाजार में अनाज और अन्य फसलों के दाम गिर जाएंगे, जिससे किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी आगामी रणनीतियों का खुलासा करते हुए बताया कि यह विरोध केवल पुतला फूंकने तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों ने घोषणा की है कि आने वाली 10 मार्च को पूरे हरियाणा में तहसील स्तर पर विशाल ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। इसके माध्यम से सरकार को चेतावनी दी जाएगी कि वे अपनी किसान विरोधी नीतियों पर पुनर्विचार करें। इसके अलावा, 23 मार्च को कुरुक्षेत्र के पीपली में एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश भर से हजारों किसान जुटेंगे और आंदोलन की अगली दिशा तय करेंगे।
करनाल के जिला सचिवालय पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच किसानों ने अपना विरोध दर्ज कराया। किसान नेताओं ने कहा कि वे मुख्यमंत्री के आवास का घेराव पहले ही कर चुके हैं और अब वे इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार इस विवादित ट्रेड डील को वापस नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। सचिवालय के बाहर जलते हुए पुतले और किसानों की गूंजती आवाजें सरकार के लिए स्पष्ट संदेश थीं कि कृषि प्रधान देश में किसानों की इच्छाओं के विरुद्ध लिए गए फैसले उन्हें स्वीकार नहीं होंगे। फिलहाल, किसानों ने अपना ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दिया है और आगामी प्रदर्शनों की तैयारी में जुट गए हैं।