करनाल में एक बार फिर नशे और तेज रफ्तार के कहर ने तीन हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। कैथल रोड स्थित नहर के पुल पर सोमवार शाम हुए भीषण सड़क हादसे में पांच दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद 16 वर्षीय जयंत ने भी दम तोड़ दिया है। जयंत 11वीं कक्षा का छात्र था और अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। इस हृदयविदारक घटना में अब मरने वालों की संख्या तीन हो गई है, जबकि आरोपी पिकअप चालक को कथित तौर पर जमानत मिलने से स्थानीय लोगों और परिजनों में प्रशासन के प्रति गहरा गुस्सा है।
यह पूरी घटना किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, लेकिन इसका अंत बेहद दुखद रहा। सोमवार शाम करीब 6:30 बजे जयंत अपने दोस्त के साथ एक्टिवा पर जा रहा था। जब वे नहर के पुल पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति नहर में डूब रहा है और उसके परिजन मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। मानवता का परिचय देते हुए जयंत और उसके दोस्त ने अपनी एक्टिवा सड़क किनारे खड़ी की और उस डूबते व्यक्ति को बचाने के लिए नीचे उतर गए। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर उस व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला और जैसे ही वे उसे पकड़कर मुख्य सड़क तक लेकर आए, तभी पीछे से आ रही एक सफेद रंग की बोलेरो पिकअप ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का आरोप है कि पिकअप चालक शराब के नशे में पूरी तरह धुत था। उसने इतनी तेज रफ्तार में टक्कर मारी कि जयंत और अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे में राजन नाम के एक व्यक्ति ने मौके पर ही या अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया था, जबकि एक अन्य अज्ञात व्यक्ति की भी मौत हो गई थी। जयंत को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ वह पिछले पांच दिनों से वेंटिलेटर पर अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था। शुक्रवार को उसने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।
हादसे के बाद आरोपी ड्राइवर ने भागने का प्रयास किया था, लेकिन सजग नागरिकों ने करीब दो किलोमीटर पीछा कर उसे दबोच लिया। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि ड्राइवर इस कदर नशे में था कि वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार तो किया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि उसे बहुत जल्द जमानत मिल गई। जयंत के पिता, जो इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते हैं, अपने इकलौते बेटे को खोने के बाद सुध-बुध खो चुके हैं। उनका कहना है कि जिस ड्राइवर ने तीन लोगों की जान ले ली, उसे कानून इतनी आसानी से कैसे छोड़ सकता है।
परिजनों ने इस मामले को लेकर स्थानीय विधायक जगमोहन आनंद से भी मुलाकात की और इंसाफ की गुहार लगाई। विधायक ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन परिवार का कहना है कि जब तक आरोपी को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, उन्हें शांति नहीं मिलेगी। इस घटना ने एक बार फिर हाईवे और मुख्य सड़कों पर पुलिस चेकिंग और ड्रंक एंड ड्राइव के खिलाफ अभियान की पोल खोल दी है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सड़कों पर निगरानी होती, तो शायद यह हादसा नहीं होता।
जयंत की मौत के बाद उसके स्कूल और मोहल्ले में शोक की लहर है। एक होनहार बच्चा, जो दूसरों की जान बचाने के लिए आगे आया था, वह स्वयं लापरवाही का शिकार हो गया। यह हादसा समाज के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गया है कि क्या दूसरों की मदद करना अब जानलेवा साबित होगा? और क्या नशे में धुत होकर मौत बांटने वाले ड्राइवरों के लिए कानून में सख्त सजा का प्रावधान नहीं होना चाहिए? फिलहाल, जयंत का परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है और प्रशासन से मांग कर रहा है कि उनके बुढ़ापे के सहारे को छीनने वाले अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।