हरियाणा के करनाल जिले में करोड़ों रुपये के कथित धान घोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में पुलिस की विशेष जांच टीमों (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करनाल मार्केट कमेटी की सचिव आशा रानी और जुंडला मार्केट कमेटी के सचिव दीपक सुहाग को गिरफ्तार किया है। इन दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद मामले की परतें और गहरी होती जा रही हैं। पुलिस ने इन्हें अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है ताकि घोटाले की पूरी कार्यप्रणाली और इसमें शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि इस पूरे खेल में ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल का दुरुपयोग किया गया। यह पोर्टल सरकार द्वारा किसानों की सुविधा और एमएसपी का लाभ दिलाने के लिए बनाया गया था, लेकिन आढ़तियों, राइस मिलर्स और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से इसमें व्यापक स्तर पर धांधली की गई। जांच अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों के पास खेती योग्य भूमि नहीं थी या जो अन्य पेशों से जुड़े थे, उनके नाम पर भी पोर्टल पर पंजीकरण कर धान की आवक दिखाई गई। कुछ मामलों में तो पांच एकड़ भूमि वाले किसानों के नाम पर 25 एकड़ की फसल का फर्जी इंदराज किया गया।
इस घोटाले का सबसे गंभीर पहलू फर्जी गेट पास का काटा जाना है। बिना किसी वास्तविक धान की आवक के कागजों में गेट पास जारी किए गए और उसी आधार पर सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद भी दिखाई गई। कागजों में दिखाए गए इस स्टॉक के गैप को भरने के लिए मिलर्स ने कथित तौर पर उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों से सस्ते दामों पर धान खरीदकर अपने गोदामों को भरा, ताकि भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान पकड़े जाने से बचा जा सके। यह पूरी प्रक्रिया सरकार को भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाने की नीयत से की गई थी।
पुलिस अब तक इस मामले में कुल छह एफआईआर दर्ज कर चुकी है और 25 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए लोगों में केवल उच्च अधिकारी ही नहीं, बल्कि फर्जी गेट पास काटने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर, आढ़ती और राइस मिलर्स भी शामिल हैं। तरावड़ी मंडी के तत्कालीन डीएफएससी अनिल कुमार को भी प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े के बदले अधिकारियों को मोटा कमीशन दिया जाता था। पूर्व में हुई गिरफ्तारियों के दौरान आरोपियों से लाखों रुपये की नकदी भी बरामद की जा चुकी है।
वर्तमान में दो अलग-अलग एसआईटी इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है। कई संदिग्ध अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और भूमिगत हो गए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। सरकार को चूना लगाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही घोटाले की कुल राशि का आधिकारिक आंकड़ा भी स्पष्ट हो जाएगा।