अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब हरियाणा के स्थानीय बाजारों में भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। करनाल जिले में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। आलम यह है कि ढाबा संचालक, रेस्तरां मालिक और कैटरर्स अब पारंपरिक चूल्हों के विकल्प तलाश रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में इंडक्शन कुकटॉप और माइक्रोवेव ओवन की मांग में अचानक भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार, कमर्शियल गैस की आपूर्ति बंद होने से अकेले करनाल जिले में लगभग 300 छोटे-बड़े खाद्य व्यवसायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कल तक जो ढाबे गैस की भट्टियों पर चलते थे, आज उनके संचालक बेबस नजर आ रहे हैं। कई ढाबा मालिकों का कहना है कि उनके पास केवल एक या दो दिन का ही गैस स्टॉक बचा है और यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो उन्हें अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़ेंगे। डीजल चूल्हों का विकल्प भी अब बाजार में उपलब्ध नहीं है, क्योंकि वर्षों पहले इनकी मांग समाप्त होने के कारण इनका निर्माण और बिक्री बंद हो चुकी है। ऐसे में व्यवसायियों के पास बिजली से चलने वाले उपकरणों के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।
बाजार की स्थिति का जायजा लेने पर पता चला कि इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई है। चौधरी इलेक्ट्रॉनिक्स के संचालक लक्ष के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन और माइक्रोवेव की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। न केवल ढाबा संचालक बल्कि आम गृहणियां भी रसोई गैस की संभावित किल्लत को देखते हुए बैकअप के तौर पर इंडक्शन खरीद रही हैं। हालांकि, बाजार में उपकरणों की कमी की खबरें भी आ रही हैं, लेकिन स्थानीय विक्रेताओं का दावा है कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। विक्रेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि मांग बढ़ने के बावजूद वे कीमतों में अनुचित वृद्धि नहीं कर रहे हैं, बल्कि कुछ मामलों में विशेष छूट भी प्रदान कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल व्यावसायिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम जनता में बेचैनी है। भंडारे, लंगर और बड़े आयोजनों में भोजन की व्यवस्था करने वाले कैटरर्स के लिए यह समय सबसे चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इंडक्शन जैसे उपकरण भारी मात्रा में भोजन तैयार करने के लिए हमेशा व्यवहार्य नहीं होते।
विश्व स्तर पर छिड़ी जंग की आहट ने स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई के बजट को हिलाकर रख दिया है। प्रशासन और सरकार के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि इस आवश्यक वस्तु की आपूर्ति को कैसे बहाल किया जाए ताकि खाद्य उद्योग से जुड़े हजारों लोगों का रोजगार सुरक्षित रह सके। फिलहाल, करनाल के बाजारों में लोग अपनी रसोई को चालू रखने के लिए बिजली के उपकरणों पर दांव लगा रहे हैं, लेकिन यह समाधान कितना स्थायी होगा, यह आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
From The Spot Anchor Deepali Dhiman: