करनाल में करोड़ों रुपये के धान घोटाले को लेकर प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने करनाल अनाज मंडी की पूर्व सचिव आशा रानी और जुंडला अनाज मंडी के सचिव दीपक कुमार को हिरासत में लिया है। यह पूरी कार्रवाई फर्जी गेट पास के माध्यम से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाने और धान की खरीद प्रक्रिया में गंभीर धांधली के आरोपों के बाद की गई है। पुलिस की एक विशेष टीम दोनों आरोपियों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्थानीय नागरिक अस्पताल लेकर पहुंची, जिसके पश्चात उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया गया।
प्रदेश के इस सबसे बड़े कृषि घोटालों में से एक की गहराई से जांच करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। इस एसआईटी में आईपीएस, एएसपी और डीएसपी स्तर के अनुभवी पुलिस अधिकारी शामिल हैं, जो निरंतर साक्ष्यों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहे हैं। जांच के दौरान यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं कि इन अधिकारियों ने कथित तौर पर मिलीभगत कर फर्जी गेट पास जारी किए थे। इन फर्जी पासों के आधार पर धान की आवक और खरीद के आंकड़ों में हेरफेर की गई, जिससे न केवल राजस्व की हानि हुई, बल्कि पूरी विपणन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए।
हिरासत में लिए जाने के बाद मंडी सचिव आशा रानी ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया, जिस पर पुलिस ने नियमानुसार उनका मेडिकल परीक्षण करवाया ताकि न्यायिक कार्यवाही में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। जांच अधिकारियों का प्राथमिक उद्देश्य अब इन आरोपियों का पुलिस रिमांड प्राप्त करना है। रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ इस घोटाले की उन परतों को खोलने में सहायक सिद्ध होगी जो अभी तक पर्दे के पीछे हैं। पुलिस का मानना है कि इन उच्चाधिकारियों से पूछताछ के माध्यम से इस भ्रष्टाचार के सिंडिकेट में शामिल अन्य रसूखदार चेहरों को भी बेनकाब किया जा सकेगा।
यह मामला केवल हालिया गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। धान घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों का एक बड़ा नेटवर्क सामने आ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों के भीतर इस प्रकरण में पांच अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी अब उन कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है जो इस पूरे अवैध कारोबार को निर्देशित कर रही थीं। ऐसी प्रबल संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में कुछ और उच्च स्तरीय अधिकारी, जिनमें पूर्व जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) भी शामिल हो सकते हैं, जांच की जद में आएंगे। उन्हें इस मामले में पूछताछ के लिए प्रोडक्शन वारंट पर भी लिया जा सकता है।
करनाल के थाना सदर क्षेत्र में दर्ज इस प्राथमिकी के बाद अनाज मंडियों में हड़कंप का माहौल व्याप्त है। फर्जी गेट पास का यह खेल काफी व्यवस्थित तरीके से संचालित किए जाने की आशंका जताई गई है। राज्य सरकार ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एसआईटी को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की है। मंडी सचिव जैसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों की संलिप्तता ने प्रशासनिक तंत्र के भीतर व्याप्त कदाचार को उजागर कर दिया है।
जांच दल अब इस दिशा में भी कार्य कर रहा है कि इन अधिकारियों के निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए किन-किन प्रभावशाली व्यापारियों या एजेंटों ने सहयोग किया था। करोड़ों रुपये के इस गबन ने अनाज मंडियों की कार्यप्रणाली और वहां होने वाली निगरानी व्यवस्था की विफलता को स्पष्ट कर दिया है। जैसे-जैसे जांच का दायरा विस्तृत हो रहा है, नए साक्ष्य और डिजिटल रिकॉर्ड्स इस घोटाले की भयावहता को और स्पष्ट कर रहे हैं।
वर्तमान में सबकी दृष्टि न्यायालय द्वारा दिए जाने वाले रिमांड और उसके उपरांत होने वाले खुलासों पर केंद्रित है। पुलिस रिमांड के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि फर्जी गेट पास बनाने के लिए किन सॉफ्टवेयरों या दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया और इस अवैध धन का वितरण किस प्रकार हुआ। प्रशासन की इस निर्णायक कार्रवाई ने उन तत्वों के भीतर भय का संचार किया है जो सरकारी व्यवस्था का लाभ उठाकर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। धान घोटाला वर्तमान में क्षेत्र का सबसे ज्वलंत प्रशासनिक मुद्दा बना हुआ है और इसकी निष्पक्ष परिणति के लिए पुलिस प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ जुटा हुआ है।