हरियाणा के करनाल में घरेलू रसोई गैस की किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। शहर की विभिन्न गैस एजेंसियों के बाहर इन दिनों ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो प्रशासन और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। कड़कड़ाती धूप और बढ़ती गर्मी के बीच सैकड़ों लोग सुबह 7:00-8:00 बजे से ही अपने खाली सिलेंडर लेकर लंबी-लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि वे पिछले 15 दिनों से सिलेंडर मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन एजेंसी संचालक उन्हें हर बार ‘गाड़ी रास्ते में है’ या ‘कल आना’ कहकर टरका रहे हैं।
इस किल्लत के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है जो किसी बड़ी अनियमितता या तकनीकी धांधली की ओर इशारा करता है। लाइन में खड़े कई उपभोक्ताओं ने अपने मोबाइल फोन दिखाते हुए शिकायत की कि उन्हें एजेंसी की ओर से ‘सिलेंडर डिलीवर’ होने के मैसेज प्राप्त हो गए हैं, जबकि हकीकत में वे अभी भी खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के बंद गेट के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि सिलेंडर स्टॉक में नहीं है, तो इन्वेंटरी से उन्हें आउट कैसे दिखाया गया और डिलीवर का मैसेज कैसे जनरेट हुआ? लोगों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है और गैस की कालाबाजारी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
एजेंसियों के बाहर खड़ी महिलाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है। कुछ महिलाओं ने रोते हुए बताया कि उनके पास घर में खाना बनाने तक के लिए गैस नहीं बची है। वे सुबह की चाय पीकर लाइन में लग जाती हैं और अपने छोटे बच्चों को घर पर अकेला छोड़कर आती हैं, लेकिन दोपहर तक भी ताला नहीं खुलता। दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों का कहना है कि वे पिछले तीन दिनों से अपनी दिहाड़ी छोड़कर यहाँ आ रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार रेट बढ़ा देती है तो वे देने को तैयार हैं, लेकिन कम से कम समय पर गैस तो उपलब्ध कराई जाए।
बताया जा रहा है कि इस किल्लत के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव, विशेषकर इजराइल और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति का असर भी स्थानीय स्तर पर गैस सप्लाई चेन पर पड़ा है। इसके साथ ही, गैस वितरण के नियमों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग बंद कर दी गई है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब एक सिलेंडर मिलने के 20 दिन नहीं, बल्कि 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग हो पाएगी। साथ ही, अब केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही बुकिंग स्वीकार की जा रही है और एक साल में मिलने वाले सिलेंडरों की संख्या भी 12 तक सीमित कर दी गई है।
गैस एजेंसियों के ताले न खुलने और कर्मचारियों द्वारा स्पष्ट जानकारी न दिए जाने से स्थिति और भी तनावपूर्ण होती जा रही है। लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस अव्यवस्था को तुरंत सुधारा जाए और जिन लोगों को बिना सिलेंडर मिले ही डिलीवरी के मैसेज आ रहे हैं, उस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए। फिलहाल, करनाल की जनता खाली सिलेंडर और अनिश्चितता के बीच पिस रही है, और यह संकट कब टलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।