February 18, 2026
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हरियाणा के करनाल जिले में स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता टीम ने शिव कॉलोनी स्थित गली नंबर नौ में चल रहे एक बिना नाम के क्लीनिक पर औचक छापेमारी की। यह कार्रवाई एक गोपनीय शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें दावा किया गया था कि यहां बिना किसी वैध डिग्री या सरकारी अनुमति के चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। छापेमारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने क्लीनिक के भीतर मौजूद रिकॉर्ड्स, मरीजों की एंट्री फाइलों और वहां रखी दवाइयों की गहनता से जांच की।

घटनास्थल पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पाया कि यह क्लीनिक पिछले करीब 20-22 वर्षों से इसी इलाके में संचालित हो रहा था। जांच के दौरान अधिकारियों ने एक-एक दवाई के पैकेट को खोलकर देखा और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि क्या ये दवाइयां एलोपैथिक हैं या होम्योपैथिक, और क्या इन्हें देने के लिए संबंधित व्यक्ति के पास आवश्यक योग्यता है। टीम ने मरीजों का पिछला डाटा भी अपने कब्जे में लिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस तरह के इलाज के नाम पर लोगों को दवाइयां दी जा रही थीं।

इस पूरी कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी हंगामा भी देखने को मिला। शिकायतकर्ता, जो खुद को क्लीनिक संचालक का रिश्तेदार बता रहा है, ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि इस स्थान पर न केवल गलत इलाज किया जा रहा है, बल्कि नशे की दवाइयां भी बेची जाती हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि संचालक के पास कोई डॉक्टरी डिग्री नहीं है और इसकी वजह से कई लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

वहीं दूसरी ओर, क्लीनिक की मालकिन ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। महिला का कहना है कि शिकायत करने वाला व्यक्ति उनका अपना भतीजा है और यह पूरी कार्रवाई आपसी जमीनी विवाद का नतीजा है। महिला ने दावा किया कि उनके पति होम्योपैथी के जानकार हैं और उनके पास संबंधित डिग्री भी मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका भतीजा गांव की जमीन को हड़पना चाहता है और जब उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उसने रंजिश निकालते हुए स्वास्थ्य विभाग को झूठी जानकारी देकर यह रेड करवाई।

छापेमारी की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और डायल 112 की टीम भी मौके पर पहुंच गई ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह क्लीनिक दशकों पुराना है और लोग यहां नियमित रूप से इलाज के लिए आते रहे हैं। हालांकि, विभाग इस बात की गंभीरता से जांच कर रहा है कि क्या बिना किसी बोर्ड या नाम के इस तरह क्लीनिक चलाना नियमों के अनुकूल है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल किसी भी अंतिम नतीजे पर पहुंचने से इनकार किया है। उनका कहना है कि जब्त की गई दवाइयों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि संचालक वास्तव में झोलाछाप है या उसके पास वैध दस्तावेज हैं। यदि जांच में कोई भी अनियमितता पाई जाती है या दवाइयां प्रतिबंधित श्रेणी की निकलती हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल, करीब एक घंटे से अधिक चली इस जांच प्रक्रिया ने इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है।

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